Supreme Court: नोटबंदी मामले में हुई सुनवाई, पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर लगाए कई गंभीर आरोप
वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम ने नोटों को विमुद्रीकृत करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 26 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की शक्ति पर सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि धारा 26 (2) केंद्र को करेंसी नोटों की केवल कुछ श्रृंखलाओं को रद्द करने की शक्ति देती है ना कि एक मूल्यवर्ग के संपूर्ण नोटों रद्द करने की।
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वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने साल 2016 में मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी को गंभीर रूप से गलत निर्णय बताया है। उन्होंने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि केंद्र सरकार अपने आप मुद्रा नोटों से संबंधित कोई प्रस्ताव शुरू नहीं कर सकती है। यह केवल केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर हो सकता है। इस निर्णय लेने की प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान, केंद्र के 2016 के फैसले का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक चिदंबरम ने न्यायमूर्ति एस ए नजीर की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ से कहा कि बैंक नोटों के मुद्दे को विनियमित करने का अधिकार पूरी तरह से भारतीय रिजर्व बैंक के पास है। केंद्र सरकार अपने आप कानूनी निविदा से संबंधित कोई भी प्रस्ताव शुरू नहीं कर सकती है। आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर ही किया जा सकता है।
पी चिदंबरम ने पीठ से यह भी कहा कि यह सबसे अपमानजनक निर्णय लेने की प्रक्रिया है जो कानून के शासन का मखौल उड़ाती है। इस प्रक्रिया को गंभीर रूप से दोषपूर्ण होने के कारण खत्म किया जाना चाहिए। नोटबंदी एक प्रमुख आर्थिक निर्णय था, जिसके कारण देश का प्रत्येक नागरिक प्रभावित हुआ। उन्होंने नोटों को विमुद्रीकृत करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 26 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की शक्ति पर सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि धारा 26 (2) केंद्र को करेंसी नोटों की केवल कुछ श्रृंखलाओं को रद्द करने की शक्ति देती है ना कि एक मूल्यवर्ग के संपूर्ण नोटों रद्द करने की।
इस दौरान वरिष्ठ वकील चिदंबरम ने अन्य भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के संभावित भयानक परिणामों" का आकलन, शोध या दस्तावेजीकरण नहीं किया गया था।
इस मामले में सुनवाई अगले हफ्ते जारी रहेगी। पीठ केंद्र के 8 नवंबर, 2016 के दो नोटों के विमुद्रीकरण के फैसले को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। गौरतलब है कि 16 दिसंबर, 2016 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसले की वैधता और अन्य संबंधित मामलों को एक आधिकारिक फैसले के लिए पांच न्यायाधीशों की एक बड़ी बेंच को भेजा था।
कॉलेजियम ने की हाई कोर्ट के सात जजो के ट्रांसफर की सिफारिश
भारत के सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुरुवार को हाई कोर्ट के सात न्यायाधीशों का अलग-अलग अदालतों में ट्रांसफर करने की सिफारिश की है। जानकारी के मुताबिक, कॉलेजियम के प्रस्ताव शीर्ष कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिये गये हैं। कॉलेजियम के सदस्यों में न्यायमूर्ति एस.के. कौल और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं।
जिन सात न्यायाधीशों का स्थानांतरण करने की सिफारिश की गई है, उनमें मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी एम वेलुमणि शामिल हैं। वह कलकत्ता उच्च न्यायालय में भेजे जाएंगे। न्यायमूर्ति बी देवानंद को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से मद्रास उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति डी रमेश को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति ललित कन्नेगांति को तेलंगना उच्च न्यायालय से कर्नाटक उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है। साथ ही न्यायमूर्ति डी नागार्जुन को तेलंगाना उच्च न्यायालय से मद्रास उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति टी राजा को मद्रास उच्च न्यायालय से राजस्थान उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति ए अभिषेक रेड्डी को तेलंगाना उच्च न्यायालय से पटना उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है। न्यायमूर्ति रेड्डी का स्थानांतरण किये जाने के विरोध में तेलंगाना उच्च न्यायालय के वकीलों ने प्रदर्शन किया था।
जल्लीकट्टू को अनुमति देने वाले तमिलनाडु के कानून के खिलाफ पेश की गईं दलील
तमिलनाडु में पोंगल के समय आयोजित होने वाले जल्लीकट्टू को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं ने दलील देते हुए कहा कि जल्लीकट्टू में पशुओं और मनुष्यों को चोट लगती है और यहां तक कि मृत्यु भी हो जाती है। ऐसे में क्रूरता वाली ऐसी चीज को अनुमति नहीं दी जा सकती। इन याचिकाकर्ताओं ने कहा ऐसा कोई प्रावधान नहीं हो सकता जो पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम जैसे किसी कानून के उद्देश्य के खिलाफ हो।
गौरतलब है कि जल्लीकट्टू या इरुथाझुवुथाल तमिलनाडु में पोंगल के समय आयोजित होता है जिसमें बेकाबू साड़ों को काबू में करने का प्रयास किया जाता है।