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Supreme Court: जेल में बंद मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चार अक्तूबर को होगी अगली सुनवाई

Fri, 15 Sep 2023 12:02 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 15 Sep 2023 12:02 PM IST
सार

सिसौदिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उन्हें मामले पर बहस करने के लिए दो से तीन घंटे का समय चाहिए। इस पर न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने मामले को अगली तारीख तक के लिए स्थगित करने का फैसला लिया। 

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supreme court news & update: SC defers hearing on bail pleas of Sisodia to October four
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के दो उत्पाद शुल्क नीति मामलों में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आप नेता मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई चार अक्तूबर तक के लिए टाल दी।

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दरअसल, सिसौदिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा कि उन्हें मामले पर बहस करने के लिए दो से तीन घंटे का समय चाहिए। इस पर न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने मामले को अगली तारीख तक के लिए स्थगित करने का फैसला लिया। 
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सिंघवी ने कहा कि सिसोदिया जेल में बंद हैं। दोनों पक्ष सुनवाई पर सहमत हैं। उन्होंने कहा कि मुझे मामले पर बहस करने के लिए कम से कम दो से तीन घंटे का समय चाहिए। इस बात से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू सहमत हुए।
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वहीं, सिसोदिया के वकील सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी यह मामले की सुनवाई होनी होती है तो अखबार इस मामले को बढ़ा-चढ़ाकर छापता है। इस पर पीठ ने कहा कि हालांकि हमने अखबार नहीं पढ़ा है, लेकिन हमें इसकी आदत डाल लेनी होगी। 

सिसोदिया की अंतरिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई चार सितंबर को
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े उन दो मामलों में आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया की अंतरिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई अक्तूबर को करेगा, जिनकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहे हैं। 

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को दिल्ली आबकारी नीति से संबंधित दो मामलों में सिसोदिया की अंतरिम जमानत याचिकाओं पर सीबीआई और ईडी से जवाब दाखिल करने को कहा था।

क्या है मामला?

दरअसल, एलजी ने दिल्ली के सचिव की एक रिपोर्ट के आधार पर मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। पिछले साल आठ जुलाई को यह रिपोर्ट भेजी गई थी। जिसमें पिछले साल लागू की गई आबकारी नीति पर सवाल उठाए गए थे। आबकारी नीति (2021-22) बनाने और उसे लागू करने में लापरवाही बरतने के साथ ही नियमों की अनदेखी और नीति के कार्यान्वयन में गंभीर चूक के आरोप हैं। 

आरोपों में निविदा को अंतिम रूप देने में अनियमितताएं और चुनिंदा विक्रेताओं को टेंडर के बाद लाभ पहुंचाना भी शामिल है। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया था कि शराब बेचने की वालों की लाइसेंस फीस माफ करने से सरकार को 144 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आबकारी मंत्री के तौर पर मनीष सिसोदिया पर भी इन प्रावधानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया था। इस आरोप का आम आदमी पार्टी ने जोरदार खंडन किया था। इसके बाद, नीति को रद्द कर दिया गया और दिल्ली के उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की, जिसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्यों को SC से राहत

सुप्रीम कोर्ट ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के चार सदस्यों के खिलाफ मणिपुर में दर्ज दो मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर पुलिस से एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामले के संबंध कोई सख्त नहीं उठाने का निर्देश दिया है। बता दें कि चार सदस्यों के खिलाफ मणिपुर में दो मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में कार्रवाई को लेकर उन्होंने सुरक्षा की मांग की थी। 

शीर्ष अदालत ने चार सदस्यों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में गिरफ्तारी से सुरक्षा दो सप्ताह के लिए बढ़ाई है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने शिकायतकर्ता से जानना चाहा कि मणिपुर में एडिटर्स गिल्ड के सदस्यों के खिलाफ समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का अपराध कैसे बनता है।

इससे पहले, सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि वह एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की याचिका पर छह सितंबर को पारित आदेश के लागू रहने की अवधि शुक्रवार तक बढ़ाती है। इस मामले में आगे सुनवाई शुक्रवार से होगी। आज जब मामले की सुनवाई हुई तो शीर्ष अदालत ने सदस्यों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही शिकायतकर्ता से जवाब मांगा कि एडिटर्स गिल्ड के सदस्यों के खिलाफ समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का अपराध कैसे बनता है।

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