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Supreme Court: कोर्ट ने सतारा जिला कलेक्टर-वन संरक्षक को नाेटिस, सरकारी जमीन से अवैध ढांचे हटाने का मामला

Fri, 11 Nov 2022 10:24 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 11 Nov 2022 10:24 PM IST
सार

महाराष्ट्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि अफजल खान के मकबरे के आसपास सरकारी जमीन पर बने अनधिकृत ढांचों को हटाने का अभियान पूरा हो गया है।

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Supreme Court News seeks reports on demolition in and around tomb of Afzal Khan in Maharashtra Updates
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में अफजल खान के मकबरे और उसके आसपास ढांचों को ढहाए जाने पर सतारा के जिला कलेक्टर और उप वन संरक्षक से रिपोर्ट मांगी है। इस दौरान महाराष्ट्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि अफजल खान के मकबरे के आसपास सरकारी जमीन पर बने अनधिकृत ढांचों को हटाने का अभियान पूरा हो गया है।

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महाराष्ट्र सरकार ने प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ को बताया कि अनधिकृत ढांचे गिराने के जिस अभियान के खिलाफ मौजूदा याचिका दायर की गई है, वह अभियान पूरा हो चुका है। सरकार और वन भूमि पर बने अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया गया है।
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शीर्ष कोर्ट ने इस अभियान के बारे में राज्य सरकार की दलीलों का संज्ञान लिया और सतारा के जिला कलेक्टर और उप वन संरक्षक को दो सप्ताह के भीतर अपनी-अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में अनधिकृत संरचनाओं की प्रकृति के साथ-साथ इस बात का भी संकेत होना चाहिए कि इन ढांचों को ढहाने के मामले में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
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इससे पहले पीठ गुरुवार को अफजल खान की कब्र और उसके आसपास जारी विध्वंस पर रोक लगाने की मांग वाली एक अंतरिम याचिका पर आज सुनवाई के लिए तैयार हो गई थी। अफजल खान महाराष्ट्र के सतारा जिले में प्रतापगढ़ किले के पास मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के हाथों मारा गया था और बाद में उसकी याद में एक मकबरा बनाया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
आरटीआई के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार : सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत के बारे में जानकारी हासिल करने को आरटीआई आवेदन दाखिल करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने शुक्रवार को दी। पोर्टल को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत स्थापित किया जा रहा है।  शीर्ष अदालत ने यह जानकारी कानून के विद्यार्थियों आकृति अग्रवाल और लक्ष्य पुरोहित की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दी। याचिका में उन्होंने आरटीआई आवेदन ऑनलाइन दाखिल करने के लिए एक प्रणाली की मांग की थी। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की शिकायत का समाधान किया जा रहा है। तदनुसार याचिका का निपटारा किया जाता है। वर्तमान में शीर्ष अदालत के संबंध में आरटीआई आवेदन डाक के माध्यम से दायर किए जाते हैं।

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court new - फोटो : istock
आवारा कुत्तों को खिलाने का मामला: 16 नवंबर को सुनवाई करेगा कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर लावारिस कुत्तों को खाना खिलाने के बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर पीठ) के फैसले के खिलाफ याचिका पर सुनवाई में कहा, गोद लेने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि लावारिस कुत्तों को घरों में लाना होगा। जस्टिस खन्ना ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के उस हिस्से को बदलने की जरूरत है जो कुत्तों को पूरी तरह से खिलाने पर रोक लगाता है। इसके बाद जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख को सूचीबद्ध किया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को नागपुर नगर निगम और पशु कल्याण बोर्ड को प्रतियां देने का निर्देश दिया। पीठ ने निर्देश दिया कि अगली तारीख तक हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए जाएंगे। मालूम हो कि बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने 20 अक्तूबर को दिए अपने आदेश में कहा था कि अगर कोई व्यक्ति लावारिस कुत्तों को खिलाने में रुचि रखता है तो वह पहले उसे गोद लेगा, उसे घर लाएगा। नगर निगम कार्यालय में इसे रजिस्टर्ड कराएगा। इसके अलावा कुत्ते को शेल्टर में भी रखा जा सकता है। कोर्ट ने नागपुर नगर निगम के कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि कुत्ते को खिलाने वाले के अपने स्थान या डॉग शेल्टर होम या किसी अन्य अधिकृत स्थान को छोड़कर किसी भी स्थान पर लावारिस कुत्तों को खाना नहीं दिया जाए।
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