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SC Updates: 'सिलिकोसिस के प्रसार को रोकने के लिए...', सुप्रीम कोर्ट का राष्ट्रीय हरित अधिकरण को आदेश

Wed, 07 Aug 2024 08:23 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 07 Aug 2024 08:23 PM IST
सार

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रसन्ना भालचंद्र वराले की पीठ ने कहा कि वैधानिक निकायों का गठन किया गया है और वे कानून के जनादेश की निगरानी और पर्यवेक्षण के लिए बेहतर स्थिति में होंगे।

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supreme court news and updates today: SC directs NGT to oversee impact of silicosis-prone industries
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को निर्देश दिया है कि वह देशभर में सिलिकोसिस संभावित उद्योगों और कारखानों के प्रभाव की निगरानी करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मुद्दे पर उसके पहले के निर्देशों का पालन करें।

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बता दें, पत्थर खनन या खदानों में काम करने वाले मजदूरों को सिलिकोसिस नामक गंभीर बीमारी का खतरा रहता है। यह बीमारी लाइलाज और जानलेवा मानी जाती है। 

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रसन्ना भालचंद्र वराले की पीठ ने कहा कि वैधानिक निकायों का गठन किया गया है और वे कानून के जनादेश की निगरानी और पर्यवेक्षण के लिए बेहतर स्थिति में होंगे। पीठ ने एनजीटी को ऐसे उद्योगों और कारखानों द्वारा सिलिकोसिस के प्रसार को रोकने के लिए कोई अतिरिक्त आवश्यक कदम उठाने का भी निर्देश दिया।
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अदालत ने कहा कि इस मामले में दूसरा पहलू यह है कि सुनिश्चित किया जाए कि प्रभावित श्रमिकों या उनके करीबी रिश्तेदारों को पर्याप्त मुआवजा जल्द से जल्द मिले। इसलिए हम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को संबंधित राज्यों में मुआवजे की प्रक्रिया की देखरेख करने का निर्देश देते हैं।
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पीठ ने आगे कहा, 'हम कर्मचारी राज्य बीमा निगम और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को भी निर्देश देते हैं कि वे एनएचआरसी के निर्देशों का पालन करें और यह सुनिश्चित करने के लिए उनके साथ सहयोग करें कि मुआवजा बिना देरी के बांटा जाए।'

शीर्ष अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस मामले से संबंधित सभी रिपोर्ट और हलफनामे एनजीटी और एनएचआरसी को भेजे जाएं ताकि उनकी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से और तेजी से पूरा किया जा सके।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट गैर सरकारी संगठन पीपुल्स राइट्स एंड सोशल रिसर्च सेंटर द्वारा दायर 2006 की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में देश भर के विभिन्न उद्योगों से श्रमिकों को होने वाली सिलिकोसिस बीमारी के गंभीर मुद्दे के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की गई थी। 

शीर्ष अदालत ने राजस्थान सरकार को भेजा नोटिस

देश की सर्वोच्च अदालत को बुधवार को केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की रिपोर्ट पर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है। दरअसल, सीईसी ने राजस्थान के सरिस्का बाघ अभयारण्य में निजी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही को लेकर चिंता व्यक्त की है। सीईसी ने इस बात पर जोर दिया है कि इससे वन्य जीवन को नुकसान पहुंच सकता है। सीईसी ने बताया है कि अभयारण्य के प्रसिद्ध पांडुपोल हनुमान मंदिर क्षेत्र में निजी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही हो रही है। शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस बारे में राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने राजस्थान सरकार से इस संबंध में 11 सितंबर तक जवाब मांगा है।

अदालत ने ईडी से जुड़े सवाल पर सुनवाई को 28 अगस्त के लिए टाला

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े एक फैसले पर पुनर्विचार के सवाल पर सुनवाई को 28 अगस्त के लिए टाल दिया। दरअसल, वर्ष 2022 में एक फैसला लिया था। इस फैसले के तहत शीर्ष अदालत ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्क करने की प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों को बरकरार रखा था। अब अदालत से एक याचिका में सवाल किया गया कि क्या उस फैसले पर पुनर्विचार हो सकता है? अदालत ने इस पर सुनवाई को 28 अगस्त तक के लिए टाल दिया। सुनवाई की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से अदालत के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने न्यायमूर्ति सूर्य कांत की अध्यक्षता में तीन न्यायधीशों की पीठ से कहा कि उन्हें इस पर जवाब देने के लिए कुछ समय चाहिए। इसके बाद अदालत ने 28 अगस्त तक के लिए सुनवाई टाल दी। 

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