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SC Updates: आंध्र प्रदेश और झारखंड समेत 11 राज्यों ने शुरू नहीं किया RTI पोर्टल, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

Tue, 24 Sep 2024 10:03 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 24 Sep 2024 10:03 PM IST
सार

पिछले साल 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और उच्च न्यायालयों को तीन महीने के भीतर आरटीआई वेबसाइट शुरू करने के निर्देश दिए थे।

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supreme court news and updates today  11 states not start RTI portal, SC sought answer
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

देश में आंध्र प्रदेश और झारखंड समेत 11 राज्यों ने अब तक सूचना का अधिकार (RTI) पोर्टल शुरू नहीं किया है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से जवाब तलब किया है। पिछले साल 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और उच्च न्यायालयों को तीन महीने के भीतर आरटीआई वेबसाइट शुरू करने के निर्देश दिए थे।

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मामले में याचिकाकर्ता अनुज नाकाडे की याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ को वकील ने बताया कि 11 राज्यों ने अपनी आरटीआई वेबसाइट अब तक नहीं शुरू की है। कोर्ट ने कहा कि आंध्र प्रदेश, झारखंड, मणिपुर, नागालैंड, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार, दमन और दीव और दादरा और नगर हवेली, जम्मू और कश्मीर, लक्षद्वीप और अरुणाचल प्रदेश ने अदालत के फैसले का पालन नहीं किया है।
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कोर्ट ने कहा कि जिन राज्यों में आरटीआई पोर्टल स्थापित किए गए हैं, वे पोर्टल भारत सरकार के दिशानिर्देशों के तहत पहुंच के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। कोर्ट ने कहा कि पोर्टल शुरू न करने वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी करें। सभी सरकारें 21 अक्तूबर तक जवाब दाखिल करें। सीजेआई ने फैसले में कहा कि शीर्ष अदालत ने आरटीआई आवेदनों के लिए एक पोर्टल भी स्थापित किया है। इससे पहले शीर्ष अदालत से संबंधित आरटीआई आवेदन केवल डाक के माध्यम से दायर किए जा रहे थे।
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युवक की हत्या की जांच सीबीआई को न सौंपने के केरल हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार
केरल के कन्नूर जिले में 2018 में दो राजनीतिक दलों सीपीआई एम और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में मरने वाले युवक शुहैब की हत्या की जांच सीबीआई को न सौंपने के केरल हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से सुप्रीम कोर्ट ने इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ पीड़ित शुहैब के माता-पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि घटना 2018 में हुई थी और जांच पूरी हो गई है। मामले में आरोप पत्र भी दायर किया गया है। पीठ ने कहा कि अब कोई भी हस्तक्षेप मामले में हानिकारक होगा। इस मामले में कुछ राजनीतिक पदाधिकारी भी आरोपी हैं। कोर्ट ने कहा कि हम केरल हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। शुहैब के माता-पिता ने शुरू में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने मार्च 2018 में मामले की जांच कन्नूर जिले के पुलिस महानिरीक्षक की अध्यक्षता वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) से सीबीआई को स्थानांतरित कर दी थी। इसके बाद केरल सरकार ने एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले को रद्द कर दिया था।

पेड़ काटने के मामले में पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी और ठेकेदार को सुप्रीम कोर्ट में उपस्थिति से मिली छूट

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रधान सचिव और निजी ठेकेदारों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने पेड़ों की कटाई को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण और अन्य के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई की। ठेकेदारों के वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम लाड दास ने कहा कि ठेकदारों ने कारण बताओ नोटिस पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है और बुधवार को उनको व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जा सकती है। मंत्रालय के वकील ने भी प्रमुख सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग की। CJI ने याचिका को अनुमति दी। पीठ इस मामले पर बुधवार को सुनवाई कर सकती है। रिज क्षेत्र में पेड़ों की कथित कटाई को लेकर डीडीए उपाध्यक्ष सुभाशीष पांडा और अन्य के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई सीजेआई कर रहे हैं। इससे पहले जस्टिस अभय एस ओका और उज्जल भुइयां की बेंच ने छतरपुर से दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय तक सड़क बनाने के लिए दक्षिणी रिज के सतबारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के लिए पांडा के खिलाफ आपराधिक अवमानना नोटिस जारी किया था।

'वैवाहिक दुष्कर्म मामले में इस सप्ताह न हो सुनवाई', केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से की अपील
वैवाहिक दुष्कर्म मामलों में पतियों को छूट देने वाले कानूनों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह इन याचिकाओं पर इस सप्ताह सुनवाई न करे। इस पर पीठ ने कहा कि हमारे पास पहले से ही दिल्ली के रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से संबंधित मामले हैं। सीजेआई ने कहा कि हम क्रमबद्ध तरीके से मामलों की सुनवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि जेट एयरवेज से जुड़ा एक मामला भी वैवाहिक बलात्कार मामले से पहले सूचीबद्ध है। मामले में एक याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील करुणा नंदी ने मामले को शीघ्र सूचीबद्ध करने संबंधी अपील की। इससे पहले 18 सितंबर को एक याचिकाकर्ता की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा था कि याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट इस विवादास्पद कानूनी प्रश्न से संबंधित याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर 16 जुलाई को सहमत हो गया था। सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ ने संकेत दिया था कि इन याचिकाओं पर 18 जुलाई को सुनवाई हो सकती है।



जस्टिस नरेंद्र को उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश नरेंद्र जी को उत्तराखंड हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है।  मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और बीआर गवई के कॉलेजियम ने कहा कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी 10 अक्तूबर को सेवानिवृत्त होगीं। इसलिए यहां नए न्यायाधीश की नियुक्ति जरूरी है। न्यायाधीश नरेंद्र जी को दो जनवरी, 2015 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके बाद उनको 30 अक्तूबर 2023 को आंध्र प्रदेश के उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। वह अनुभवी न्यायाधीश हैं। 

कॉलेजियम ने कहा कि न्यायमूर्ति नरेंद्र उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए हर तरह से फिट और उपयुक्त हैं। इसके अलावा कॉलेजियम ने पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए न्यायिक अधिकारी शशि भूषण प्रसाद सिंह और अशोक कुमार पांडे के नामों की भी सिफारिश की। वहीं कॉलेजियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए नौ अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश की। 

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