{"_id":"656d891d4b829ece580c6877","slug":"supreme-court-news-and-update-notifies-5-judge-bench-for-reconsidering-2018-verdict-on-grant-of-stay-by-courts-2023-12-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: किसी मामले से खुद स्टे हटने के फैसले पर होगा पुनर्विचार, CJI ने पांच जजों वाली पीठ को किया अधिसूचित","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: किसी मामले से खुद स्टे हटने के फैसले पर होगा पुनर्विचार, CJI ने पांच जजों वाली पीठ को किया अधिसूचित
Mon, 04 Dec 2023 01:44 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Mon, 04 Dec 2023 01:44 PM IST
सार
इस मुद्दे पर संविधान पीठ असम में अवैध प्रवासियों से संबंधित नागरिकता अधिनियम की धारा 6 ए की संवैधानिक वैधता से संबंधित एक अन्य मामले में कार्यवाही पूरी होने के बाद सुनवाई शुरू करेगी।
विज्ञापन
supreme court
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने ‘एशियन रिसर्फेसिंग मामले’ पर अपने 2018 के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को अधिसूचित किया है। बता दें, इस आदेश में कहा गया है कि छह महीने की समय सीमा खत्म होने पर सभी दीवानी और आपराधिक मामलों में स्टे खुद-ब-खुद हट जाएगा।
विज्ञापन
एक अन्य मामले में कार्यवाही पूरी होने के बाद सुनवाई होगी शुरू
अधिसूचना के अनुसार, संविधान पीठ में न्यायमूर्ति अभय एस ओका, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला, न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा शामिल होंगे। इस मुद्दे पर संविधान पीठ असम में अवैध प्रवासियों से संबंधित नागरिकता अधिनियम की धारा 6 ए की संवैधानिक वैधता से संबंधित एक अन्य मामले में कार्यवाही पूरी होने के बाद सुनवाई शुरू करेगी।
विज्ञापन
राकेश द्विवेदी की याचिका पर दिया था ध्यान
प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला तथा न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने ‘हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ऑफ इलाहाबाद’ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी की याचिका पर ध्यान दिया था कि 2018 का फैसला संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को प्रदत्त शक्ति को छीन लेता है।
विज्ञापन
इनसे मांगा सहयोग
वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी की बात सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले को संविधान पीठ के सामने रखने के लिए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरामनी या सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सहयोग करने के लिए कहा। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से पेश हुए द्विवेदी ने कहा था कि 2018 के निर्देश बहुत सारी कठिनाइयां पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में वे निर्देश कानूनी तौर पर बाध्य नहीं थे। उन्होंने पूछा कि सवाल यह है कि क्या संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट की धारा 226 के तहत शक्ति को इस तरह से कम किया जा सकता है।
खुद-ब-खुद रद्द हो जाएगा
‘एशियन रिसर्फेसिंग ऑफ रोड एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक बनाम सीबीआई के मामले में अपने फैसले में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि उच्च न्यायालयों सहित अदालतों द्वारा दिए गए स्थगन के अंतरिम आदेश, जब तक कि उन्हें विशेष रूप से बढ़ाया नहीं जाता, खुद ब खुद रद्द हो जाएगा। इसका मतलब कोई भी मुकदमा या कार्यवाही छह महीने के बाद स्थगित नहीं रह सकती। बाद में शीर्ष अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया था कि यदि स्थगन आदेश उसके द्वारा पारित किया गया है तो यह निर्णय लागू नहीं होगा।