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सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: व्यापार बन गए हैं मेडिकल की पढ़ाई और नियम 

Tue, 05 Oct 2021 09:57 PM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Amit Mandal Updated Tue, 05 Oct 2021 09:57 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने कहा कि प्राधिकरण खुद को दुरुस्त कर ले नहीं तो कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सत्ता के खेल में युवा डॉक्टरों को फुटबाल न बनाया जाए।

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Supreme Court: Medical studies and rules have become business
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

विस्तार

सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2021 के पैटर्न में आखिरी समय बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने कहा, मेडिकल शिक्षा और उसका विनियमन अब कारोबार बनता जा रहा है। प्राधिकरण इसे गंभीरता सेे लेते हुए खुद को दुरुस्त कर ले नहीं तो कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं।   

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, ऐसा जान पड़ता है कि परीक्षा के पैटर्न में बदलाव यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि निजी मेडिकल कालेजों में सीटें खाली न रहें। इस कदम से यह संदेश मिल रहा है कि मेडिकल शिक्षा एक बिजनेस बन गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 13-14 को प्रस्तावित परीक्षा को दो महीने टालने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया और सरकार को बुधवार को फिर से विचार करके आने को कहा है। 
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पीठ ने कहा, आखिरी समय में परीक्षा पैटर्न में बदलाव तार्किक होना चाहिए। आखिर ऐसा करने की इतनी हड़बड़ाहट क्यों थी? सरकार को छात्रों की कुछ चिंता करनी चाहिए। इन छात्रों ने इतने लंबे समय से तैयारी की है। ऐसे में परीक्षा के पैटर्न में अचानक बदलाव उनके लिए बेहद परेशानी वाली बात है। जिस दिन से छात्र एमबीबीएस में दाखिला लेते हैं, उनका लक्ष्य सुपर स्पेशियलिटी में जाने का होता है। वे लगातार इसके लिए गहन अध्ययन करते हैं।
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दो महीने बर्बाद क्यों कर रहे
पीठ ने सरकार से सवाल किया, आप कह रहे हैं कि परीक्षा दो महीने और टाल दी जाए। छात्र इतने लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं। इनके दो महीने बर्बाद क्यों कर रहे आप? केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा, केवल 41 छात्रों ने याचिका दायर की है जबकि पांच हजार छात्र परीक्षा में बैठते हैं। इस पर जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा, अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले लोगों की संख्या कोई मायने नहीं रखती। इन 41 के पास कोई विकल्प नहीं है। यह उनके जीवन और करियर का मामला है। उन्हें भी अंतत: परीक्षा में शामिल होना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इस पूरे मसले पर फिर से विचार करने के लिए कहा है। बुधवार को सुनवाई जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में भी इस मसले को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सत्ता के खेल में युवा डॉक्टरों को फुटबाल न बनाया जाए।


पैटर्न में बदलाव परीक्षा में लचीलापन लाने के लिए, छात्रों को लाभ होगा  
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन के वकील मनिंदर सिंह ने कहा, पैटर्न में बदलाव छात्रों के लिए परीक्षा में लचीलापन लाने के इरादे से किया गया। इसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि परीक्षा उन पाठ्यक्रमों के आधार पर आधारित हो जिन्हें छात्र पहले से जानते हैं। इसमें यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सुपर स्पेशियलिटी सीटें खाली न रहें। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा, क्या यह निजी कालेजों को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं, क्योंकि अधिकांश सीटें तो वहीं हैं। जवाब में सिंह ने कहा, ऐसा कुछ नहीं है। 
 

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