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Supreme Court: कर्नाटक के डिप्टी CM के खिलाफ CBI व भाजपा MLA की याचिकाएं, जस्टिस सूर्यकांत की पीठ करेगी सुनवाई

Mon, 22 Sep 2025 04:21 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 22 Sep 2025 04:21 PM IST
सार

कर्नाटक सरकार ने सीबीआई को जांच के लिए सहमति देने के बाद वापस ले लिया था। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। एक भाजपा विधायक ने भी प्रदेश के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के खिलाफ याचिका दायर कराई है। चीफ जस्टिस बीआर गवई की खंडपीठ ने इस पर संक्षिप्त सुनवाई करने के बाद कहा कि इन मामलों को न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ में सुना जाएगा। जानिए क्या है पूरा मामला

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Supreme Court Justice Surya Kant Led bench to hear petitions of CBI and BJP MLA against Karnataka Deputy CM
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले (Disproportionate Assets) के मामले की जांच से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई अब जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी। सोमवार को चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस वी विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा, यह मामला पहले भी जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष लंबित था। इस पर कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, न्यायालय ने पहले ही कहा था कि राजनीतिक विवाद अदालतों में नहीं सुलझाए जाने चाहिए। इस पर सीजेआई गवई ने कहा, न्याय के हित में यही होगा कि इन याचिकाओं पर उसी पीठ में सुनवाई की जाए।

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क्या है सुप्रीम कोर्ट का यह मामला
गौरतलब है कि यह मामला कर्नाटक सरकार की तरफ से सीबीआई को दी गई सहमति वापस लेने से जुड़ा है। इस मामले में करीब दो साल पहले अक्तूबर 2023 में भी सीबीआई ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। तत्कालीन राज्य सरकार ने शिवकुमार के खिलाफ जांच की अनुमति वापस ले ली थी। भाजपा नेता बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने भी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उस समय भी अदालत ने ने शिवकुमार और राज्य सरकार से जवाब मांगा था।
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आमदनी से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप
बता दें कि 25 सितंबर 2019 को तत्कालीन भाजपा सरकार ने सीबीआई को अनुमति दी थी कि वह आयकर विभाग और ईडी की जांच के आधार पर शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करे। इस आधार पर सीबीआई ने करीब पांच साल पहले 3 अक्तूबर 2020 को मामला दर्ज किया। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर आरोप है कि उन्होंने 2013 से 2018 के बीच 74.93 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की, जो उनकी घोषित आय से अधिक है।
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ये भी पढ़ें- Jacqueline Fernandez: सुप्रीम कोर्ट से जैकलीन को झटका, 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ी याचिका खारिज


कर्नाटक हाईकोर्ट खारिज कर चुका है CBI और भाजपा विधायक की याचिकाएं
हालांकि, कांग्रेस नेता और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद 23 नवंबर 2023 को कर्नाटक सरकार ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के फैसले को 'कानून के अनुरूप नहीं' बताया। इसी के साथ सरकार ने सीबीआई को दी गई सहमति वापस ले ली। सीएम सिद्धारमैया नीत राज्य सरकार ने 26 दिसंबर 2023 को यह मामला लोकायुक्त को सौंप दिया। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 29 अगस्त 2023 को सीबीआई और यतनाल की याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

ये भी पढ़ें- SC Updates: दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शरजील को फिर नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने पुलिस से मांगा जवाब

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट का छह साल पुराना फैसला क्या?
बता दें कि ईडी ने भी डीके शिवकुमार को आयकर जांच से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सितंबर, 2019 में गिरफ्तार किया था। हालांकि अक्तूबर 2019 में उन्हें जमानत मिल गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इसे किसी अपराध से नहीं जोड़ा जा सकता।

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