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SC: 'वकील साहब, मत जाइए, आपकी जरूरत पड़ेगी', सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पारदीवाला ने क्यों कही ये बात?

Sun, 15 Feb 2026 05:34 AM IST
देवेश त्रिपाठी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Sun, 15 Feb 2026 05:34 AM IST
सार

जस्टिस पारदीवाला अपनी सहनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने इंजीनियर साहब को खूब सुना, लेकिन जब उन्होंने आदेश लिखवाना शुरू किया, तो साहब फिर से बीच में कूद पड़े। जज साहब ने कई बार समझाया, पर याची लगातार अपनी दलीलें देता रहा।

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supreme court justice jb pardiwala in courtroom exchange with advocate says do not go you will be needed
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की एक शांत अदालत, सब कुछ आर्डर-आर्डर के हिसाब से चल रहा। पीठासीन जस्टिस भी ऐसे जो अपनी सख्ती के लिए जाने जाते हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला के सामने एक मामला आया। एक इंजीनियर साहब 37 लाख के अजग-गजब हिसाब में गूगल मैप्स की तरह शीर्ष अदालत को ही घुमाना शुरू कर देते हैं। हद तो ये है कि खुद जस्टिस पारदीवाला को बचाव के लिए अधिवक्ता महोदय को अदालत में रोकना पड़ा। उन्होंने कहा, वकील साहब मत जाइए, मुझे आपकी जरूरत पड़ेगी।
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मामला सीमा सड़क कार्य बल के एक मैकेनिकल इंजीनियर की बहाली और उनके बकाये वेतन से जुड़ा था। हाईकोर्ट के आदेशानुसार उन्हें करीब 37 लाख रुपये का भुगतान होना था। जब जस्टिस पारदीवाला ने सीधे सवाल किया कि क्या आपको अपनी राशि प्राप्त हो गई है? तो याची ने सीधा जवाब देने के बजाय बातों की जलेबी बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके कोलकाता वाले बैंक खाते में पैसे नहीं आए हैं। जब अदालत ने थोड़ा और जोर देकर पूछा, तब विभाग के वकील ने पोल खोली कि पैसे तो राजौरी वाले खाते में भेजे जा चुके हैं। आखिरकार याची को स्वीकार करना पड़ा कि हां, राजौरी वाले खाते में रकम मिल गई है। 
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जब माय लॉर्ड को कहना पड़ा-अपना मुंह बंद रखिए
जस्टिस पारदीवाला अपनी सहनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने इंजीनियर साहब को खूब सुना, लेकिन जब उन्होंने आदेश लिखवाना शुरू किया, तो साहब फिर से बीच में कूद पड़े। जज साहब ने कई बार समझाया, पर याची लगातार अपनी दलीलें देता रहा। आखिरकार, जस्टिस पारदीवाला ने सख्त लहजे में कहा कि अपना मुंह बंद रखिए और मुझे आदेश लिखवाने दीजिए! आपका व्यवहार बता रहा है कि आप नौकरी के लायक ही नहीं हैं।
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फिर जज साहब ने वकील की ओर देखा और मानो अपनी बात का सबूत देते हुए कहा कि इसीलिए मैंने आपको रुकने को कहा था। जज साहब को पता था कि जब मुवक्किल कानून से ज्यादा अपनी कहानियों पर भरोसा करने लगे, तो सिर्फ उनका वकील ही उन्हें मर्यादा में रख सकता है।

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