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ECI: 'चुनाव कराने वाले अगर प्रत्याशियों पर निर्भर हों तो निष्पक्षता संभव नहीं', जस्टिस नागरत्ना की टिप्पणी

Sun, 05 Apr 2026 02:51 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 05 Apr 2026 02:51 PM IST
सार

जस्टिस बीवी नागरत्ना ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की बुनियाद बताते हुए कहा कि संस्थाओं की निर्भरता और आपसी संतुलन खत्म होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि चुनाव केवल समय-समय पर होने वाली प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि इसी के जरिए राजनीतिक सत्ता का निर्माण होता है।

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Supreme Court Justice BV Nagarathna says Neutrality of polls can not be assured if EC dependent on contestants
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी नागरत्ना ने कहा कि अगर चुनाव कराने वाली संस्थाएं चुनाव लड़ने वालों पर निर्भर हो जाएं, तो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
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पटना के चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी में राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल व्याख्यान देते हुए उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका काम चुनावों की शुचिता बनाए रखना है।
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संरचनात्मक स्वतंत्रता पर जताई चिंता
जस्टिस नागरत्ना ने 1995 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को उच्च महत्व की संवैधानिक संस्था माना गया है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव कराने वाले ही प्रत्याशियों पर निर्भर होंगे, तो निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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चुनाव सिर्फ प्रक्रिया नहीं
उन्होंने कहा कि चुनाव केवल समय-समय पर होने वाली प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि इसी के जरिए राजनीतिक सत्ता का निर्माण होता है। समय पर चुनाव होने से देश में सरकारों का शांतिपूर्ण बदलाव संभव हुआ है।

संस्थाओं की भूमिका अहम
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि सत्ता केवल संस्थानों से नहीं, बल्कि उन प्रक्रियाओं से भी संचालित होती है जो उन्हें बनाए रखती हैं, जैसे चुनाव, सार्वजनिक वित्त और नियम व्यवस्था। उन्होंने कहा कि संवैधानिक ढांचे को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि संस्थाएं एक-दूसरे पर निगरानी रखें।

संरचना कमजोर होने का खतरा
उन्होंने चेतावनी दी कि जब संस्थाएं एक-दूसरे की जांच करना बंद कर देती हैं, तब संवैधानिक ढांचा कमजोर होने लगता है। ऐसे में चुनाव, अदालतें और कानून तो बने रहते हैं, लेकिन सत्ता पर नियंत्रण कम हो जाता है।


केंद्र-राज्य संबंधों पर सुझाव
जस्टिस नागरत्ना ने केंद्र से राज्यों को सहयोगी के रूप में देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि शक्तियों का विभाजन समान स्तर के सहयोग पर आधारित है और शासन राजनीतिक दलों के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्यों को समन्वयकों के रूप में देखने का आग्रह किया, न कि अधीनस्थों के रूप में।

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