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पराली से प्रदूषण: जब सुप्रीम कोर्ट के जज सूर्यकांत बोले, मैं भी एक किसान परिवार से हूं

Sat, 13 Nov 2021 05:24 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 13 Nov 2021 05:24 PM IST
सार

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए तुषार मेहता ने जब सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ये मशीनें 80 फीसदी सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, अदालत ने उनसे कुछ सवाल पूछे। 

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Supreme Court judge Justice Surya Kant said he hails from a farmer family
supreme court - फोटो : ANI

विस्तार

किसानों द्वारा पराली जलाए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्य कांत ने शनिवार को कहा कि वह भी एक किसान हैं और चीफ जस्टिस एनवी रमना भी एक किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि  गरीब-सीमांत किसान पराली प्रबंधन के लिए मशीन नहीं खरीद सकते हैं। 

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गरीब किसान नहीं खरीद सकते महंगी मशीन
सुनवाई के दौरान जस्टिस कांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, आप कह रहे हैं कि दो लाख मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन गरीब किसान यह नहीं खरीद सकते। यूपी, पंजाब और हरियाणा में जोत तीन एकड़ से भी कम है। हम उन किसानों से उन मशीनों को खरीदने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। 
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जस्टिस कांत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मशीनें क्यों नहीं उपलब्ध करा सकती हैं? पेपर मिल्स और अन्य उद्देश्यों के लिए इन्हें लिया जाए। राजस्थान में सर्दियों में पराली बकरियों आदि के लिए चारा हो सकती हैं। सर्वोच्च अदालत में पर्यावरण कार्यकर्ता आदित्य दुबे और लॉ स्टूडेंट अमन बांका की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही थी, जिसमें उन्होंने छोटे किसानों के लिए मुफ्त में पराली हटाने वाली मशीनें उपलब्ध कराने के लिए निर्देश की मांग की थी।
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किसानों को दोष देना बन गया है फैशन
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ये मशीनें 80 फीसदी सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज ने मेहता से पूछा कि क्या उनकी सहायता करने वाले अधिकारी सब्सिडी के बाद वास्तविक कीमत बता सकते हैं। चीफ जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के साथ बैठे जस्टिस कांत ने कहा कि क्या किसान इसका वहन कर सकते हैं। मैं एक किसान हूं और मैं जानता हूं, सीजेआई भी एक किसान परिवार से हैं और वह भी जानते हैं और मेरे भाई (जज) भी इसे जानते हैं। जस्टिस कांत ने यह भी कहा कि वायु प्रदूषण के लिए किसानों को दोष देना फैशन बन गया है।

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