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Supreme Court: जमीयत बोला- हलाल प्रमाणन पर सरकारी दावे से पूर्वाग्रह पैदा हुआ, सॉलिसिटर जनरल के बयान पर आपत्ति
Mon, 24 Feb 2025 11:55 PM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 24 Feb 2025 11:55 PM IST
सार
जमीयत उलेमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट ने हलाल प्रमाणन के मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा। जमीयत ने कहा कि इस मामले में केंद्र के दावों से पूर्वाग्रह पैदा हुआ। ट्रस्ट ने सॉलिसिटर जनरल के बयानों पर भी आपत्ति दर्ज कराई।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
जमीयत उलेमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हलाल प्रमाणन प्रक्रिया पर केंद्र के दावों से पूर्वाग्रह पैदा हुआ है। ट्रस्ट ने केंद्र की तरफ से दिए गए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बयानों पर आपत्ति जताई। हलाल प्रमाणित उत्पादों पर प्रतिबंध को लेकर पिछली सुनवाई के दौरान सालिसिटर जनरल ने कहा था कि हलाल प्रमाणित करने वाली एजेंसियां प्रमाणन प्रक्रिया से हजारों कमाती हैं। कोर्ट को इस बड़े मुद्दे पर विचार करना चाहिए कि क्या पूरे देश को हलाल प्रमाणित उत्पादों की कीमत सिर्फ इसलिए चुकानी चाहिए क्योंकि कुछ लोग इसकी मांग कर रहे हैं। ट्रस्ट उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लगाए गए इस प्रतिबंध के खिलाफ याचिका दायर करने वालों में से एक है।
ट्रस्ट ने शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा कि केंद्र सरकार के दावों ने याचिकाकर्ताओं को बदनाम किया और उन्हें निशाना बनाया, जिसके बाद कुछ मीडिया संगठनों ने बहस शुरू की और हलाल प्रमाणन प्रक्रिया को और बदनाम किया। इसके परिणामस्वरूप हलाल की अवधारणा और इसकी प्रमाणन प्रक्रिया के खिलाफ एक कहानी बनाई गई।
केंद्र पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया
ट्रस्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने भ्रामक प्रस्तुतियां दी हैं, जिससे हलाल की अवधारणा के प्रति गंभीर पूर्वाग्रह पैदा हुआ है और पूर्वाग्रही मीडिया को हलाल की अवधारणा के खिलाफ़ एक कहानी बनाने का मौका मिला है। याचिकाकर्ता ने न्यायालय से केंद्र सरकार को यह बताने का निर्देश देने की मांग की है कि किस केंद्रीय सरकारी अधिकारी ने सॉलिसिटर जनरल को वैसा बयान देने का निर्देश दिया, जो आधारहीन और असंगत थे।
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हलाल प्रमाणीकरण सभी वस्तुओं पर लागू: जमीयत
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि हलाल प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को केवल मांसाहारी वस्तुओं या केवल निर्यात उद्देश्यों के लिए वस्तुओं तक सीमित नहीं किया जा सकता है। यह प्रक्रिया प्रत्येक भारतीय उपभोक्ता के अधिकार का हिस्सा है कि उसे अपने दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले किसी भी उत्पाद के संबंध में जानकारी मिले। जहां तक सरकारी अधिसूचना के उल्लंघन के लिए एफआईआर दर्ज किए जाने की बात है, तो यह प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इसका कोई औचित्य नहीं है।
तुलसी जल में भी पशु वसा संभव : ट्रस्ट
एसजी मेहता की ओर से बोतलबंद पानी, लिपस्टिक, तुलसी जल आदि के लिए भी हलाल-प्रमाणीकरण पर सवाल उठाए जाने पर हलफनामा में कहा गया है कि इन उत्पादों के कुछ निर्माता पशु वसा, अल्कोहल-आधारित अर्क और एंजाइम (जो जानवरों से प्राप्त हो सकते हैं) का उपयोग करते हैं। जहां तक पानी की बात है तो उसे गंध, रंग आदि को हटाने के लिए कार्बन फिल्टर से गुजारा जाता है और इस्तेमाल किया जाने वाला चारकोल पशु की हड्डी से प्राप्त हो सकता है।
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ट्रस्ट ने शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा कि केंद्र सरकार के दावों ने याचिकाकर्ताओं को बदनाम किया और उन्हें निशाना बनाया, जिसके बाद कुछ मीडिया संगठनों ने बहस शुरू की और हलाल प्रमाणन प्रक्रिया को और बदनाम किया। इसके परिणामस्वरूप हलाल की अवधारणा और इसकी प्रमाणन प्रक्रिया के खिलाफ एक कहानी बनाई गई।
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केंद्र पर भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया
ट्रस्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने भ्रामक प्रस्तुतियां दी हैं, जिससे हलाल की अवधारणा के प्रति गंभीर पूर्वाग्रह पैदा हुआ है और पूर्वाग्रही मीडिया को हलाल की अवधारणा के खिलाफ़ एक कहानी बनाने का मौका मिला है। याचिकाकर्ता ने न्यायालय से केंद्र सरकार को यह बताने का निर्देश देने की मांग की है कि किस केंद्रीय सरकारी अधिकारी ने सॉलिसिटर जनरल को वैसा बयान देने का निर्देश दिया, जो आधारहीन और असंगत थे।
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हलाल प्रमाणीकरण सभी वस्तुओं पर लागू: जमीयत
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि हलाल प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को केवल मांसाहारी वस्तुओं या केवल निर्यात उद्देश्यों के लिए वस्तुओं तक सीमित नहीं किया जा सकता है। यह प्रक्रिया प्रत्येक भारतीय उपभोक्ता के अधिकार का हिस्सा है कि उसे अपने दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले किसी भी उत्पाद के संबंध में जानकारी मिले। जहां तक सरकारी अधिसूचना के उल्लंघन के लिए एफआईआर दर्ज किए जाने की बात है, तो यह प्रक्रिया का दुरुपयोग है और इसका कोई औचित्य नहीं है।
तुलसी जल में भी पशु वसा संभव : ट्रस्ट
एसजी मेहता की ओर से बोतलबंद पानी, लिपस्टिक, तुलसी जल आदि के लिए भी हलाल-प्रमाणीकरण पर सवाल उठाए जाने पर हलफनामा में कहा गया है कि इन उत्पादों के कुछ निर्माता पशु वसा, अल्कोहल-आधारित अर्क और एंजाइम (जो जानवरों से प्राप्त हो सकते हैं) का उपयोग करते हैं। जहां तक पानी की बात है तो उसे गंध, रंग आदि को हटाने के लिए कार्बन फिल्टर से गुजारा जाता है और इस्तेमाल किया जाने वाला चारकोल पशु की हड्डी से प्राप्त हो सकता है।