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Supreme Court: मणिपुर में इनर लाइन परमिट प्रणाली के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी, जानिए पूरा मामला
Mon, 03 Jan 2022 09:04 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 03 Jan 2022 09:04 PM IST
सार
जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने इस मामले में केंद्र और मणिपुर सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब मांगा है। परमिट प्रणाली, कानूनों के अनुकूलन (संशोधन) आदेश, 2019 (2019 आदेश) के माध्यम से पेश की गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : Social Media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर में इनर लाइन परमिट (आईएलपी) की प्रणाली को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र व मणिपुर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। ‘अमरा बंगाली’ नामक संगठन ने इस परमिट प्रणाली को चुनौती देते हुए कहा, यह राज्य को गैर-स्वदेशी व्यक्तियों या जो मणिपुर के स्थायी निवासी नहीं हैं, के प्रवेश व निकास को प्रतिबंधित करने की बेलगाम शक्ति प्रदान करती है।
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याचिकाकर्ता ने दलील दी कि कठोर आईएलपी प्रणाली राज्य के भीतर पर्यटन, जो राजस्व सृजन का एक प्रमुख स्रोत है, को बाधित करने के अलावा इनर लाइन से परे क्षेत्र में सामाजिक एकीकरण, विकास और तकनीकी प्रगति की नीतियों का मूल रूप से विरोध करती है। जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने इस मामले में केंद्र और मणिपुर सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब मांगा है। परमिट प्रणाली, कानूनों के अनुकूलन (संशोधन) आदेश, 2019 (2019 आदेश) के माध्यम से पेश की गई थी। जो 140 साल पुराने औपनिवेशिक कानून, बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 (बीईएफआर) का विस्तार करती है।
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याचिका में कहा गया है कि बीईएफआर को अंग्रेजों ने असम (तब बंगाल का हिस्सा) में चाय बागानों पर एकाधिकार बनाने और पहाड़ी इलाकों में अपने व्यावसायिक हितों को भारतीयों से बचाने के लिए अधिनियमित किया था। बीईएफआर भारतीयों को उस क्षेत्रों में आदिवासी आबादी के साथ व्यापार करने से रोकता है। 2019 के आदेश के आधार पर आईएलपी प्रणाली को प्रभावी रूप से अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड के जिलों पर लागू किया गया है।
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याचिका के मुताबिक मणिपुर राज्य में आईएलपी प्रणाली का प्रभाव यह है कि कोई भी व्यक्ति जो उक्त राज्य का निवासी नहीं है उसे ‘इनर लाइन परमिट’ के लिए आवेदन किए बिना राज्य में प्रवेश करने या वहां व्यापार करने की अनुमति नहीं है। अनुकूलन आदेश के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के हितों की रक्षा की आड़ में आज तक कानून जारी है।
वकील फुजैल अहमद अय्यूबी के माध्यम से दायर याचिकाकर्ता ने मणिपुर इनर लाइन परमिट दिशा-निर्देश, 2019 को भी चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि 2019 का आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14, 15, 19 और 21 के तहत गारंटीकृत नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।