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Supreme Court: 'संदेह कितना भी प्रबल हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता', बच्चे की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट

Tue, 07 Oct 2025 07:34 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 07 Oct 2025 07:34 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संदेह, चाहे कितना भी प्रबल हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता। 2007 में 10 वर्षीय लड़के की हत्या के मामले में तीन आरोपियों को बरी करते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन के पास ठोस साक्ष्य नहीं थे। सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और संदिग्ध गवाहियों के आधार पर सजा देना न्यायसंगत नहीं, अपीलकर्ताओं को संदेह का लाभ मिला।

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Supreme Court Justice Sundaresh and SC Sharma Bench Case of Child Murder Strong Suspicion Replace Evidence
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संदेह चाहे कितना भी प्रबल क्यों न हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता। न्यायालय ने 2007 में 10 वर्षीय एक लड़के की हत्या के आरोप से तीन लोगों को बरी कर दिया। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के मामले में काफी कमियां सामने आई हैं। रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य किसी भी तरह से आरोपियों के अपराध की ओर इशारा करने वाली परिस्थितियों की शृंखला को पूरा नहीं कर सकते। पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के नवंबर 2017 के फैसले को चुनौती देने वाली तीन आरोपियों की अपील स्वीकार कर ली।

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हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी थी। पीठ ने कहा, वैज्ञानिक परीक्षणों की अनदेखी करते हुए संदिग्ध गवाही के आधार पर दोषी ठहराना सबूत की जगह संदेह को स्थापित करना है।
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पीठ ने कहा, जैसा कि सर्वविदित है, संदेह, चाहे कितना भी प्रबल क्यों न हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता। इस तरह अपीलकर्ता संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं। यह देखते हुए कि मामला पूरी तरह से परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है, पीठ ने कहा कि पहली और सबसे स्पष्ट परिस्थिति प्राथमिकी में दोनों अपीलकर्ताओं के नामों का छूट जाना था। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस चूक को स्वीकार किया, लेकिन इसे महत्वहीन बताकर खारिज कर दिया। यह दृष्टिकोण अस्वीकार्य है। पीठ ने कहा, सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामले में, प्रत्येक परिस्थिति की कठोर जांच होनी चाहिए।

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