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सुप्रीम कोर्ट: संविधान के 97वें संशोधन की वैधता बरकरार, सहकारी समितियों संबंधी प्रावधान को किया खत्म, जानें क्या था विवाद

Tue, 20 Jul 2021 01:01 PM IST
दीप्ति मिश्रा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Tue, 20 Jul 2021 01:01 PM IST
सार

न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति के एम जोसफ और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'हमने सहकारी समितियों से संबंधित संविधान के भाग नौ बी को हटा दिया है, लेकिन हमने संशोधन को बचा लिया है।'

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Supreme Court  in majority verdict quashes part of Constitution inserted by 97th amendment on cooperatives
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक के मुकाबले दो के बहुमत से फैसला सुनाते हुए सहकारी समितियों के प्रभावी प्रबंधन संबंधी मामलों से निपटने वाले संविधान के 97वें संशोधन की वैधता बरकरार रखी, लेकिन इसके जरिये जोड़े गए उस हिस्से को खारिज कर दिया, जो संविधान एवं सहकारी समितियों के कामकाज से संबंधित है।

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न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति के एम जोसफ और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'हमने सहकारी समितियों से संबंधित संविधान के भाग नौ बी को हटा दिया है, लेकिन हमने संशोधन को बचा लिया है।'
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न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा कि न्यायमूर्ति जोसफ ने आंशिक असहमति वाला फैसला दिया है और पूरे 97वें संविधान संशोधन को रद्द कर दिया है।

क्या है मामला?
संसद ने दिसंबर 2011 में देश में सहकारी समितियों के प्रभावी प्रबंधन से संबंधित 97वां संविधान संशोधन पारित किया था। यह 15 फरवरी, 2012 से लागू हुआ था। संविधान में परिवर्तन के तहत सहकारिता को संरक्षण देने के लिए अनुच्छेद 19(1)(सी) में संशोधन किया गया और उनसे संबंधित अनुच्छेद 43 बी और भाग नौ बी को सम्मिलित किया गया।
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केंद्र ने दलील दी कि यह प्रावधान राज्यों को सहकारी समितियों के संबंध में कानून बनाने की उनकी शक्ति से वंचित नहीं करता है।

केंद्र ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
 केंद्र ने 2013 में 97वें संविधान संशोधन के कुछ प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि सहकारी समितियों के संबंध में संसद कानून नहीं बना सकती क्योंकि यह राज्य का विषय है।

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