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Freebies in Election: मुफ्त के वादे करने पर खत्म हो मान्यता, मामले में सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को अहम निर्देश
Tue, 26 Jul 2022 12:28 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 26 Jul 2022 12:28 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त के चुनावी वादों के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की। केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगने के साथ कोर्ट ने 3 अगस्त को आगे सुनवाई तय की है।याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक कोष से चीजें मुफ्त में देने के वादे पर रोक लगाई जाए।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट से देश में चुनाव के दौरान मुफ्त की चीजें बांटने का वादा करने वाले राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने की मांग की गई है। इस पर शीर्ष कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह वित्त आयोग से पता लगाए कि पहले से कर्ज में डूबे राज्य में मुफ्त की योजनाओं का अमल रोका जा सकता है या नहीं?
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सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त के चुनावी वादों के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की। केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगने के साथ कोर्ट ने 3 अगस्त को आगे सुनवाई तय की है।
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चुनाव आयोग ने दी थी यह राय
इस याचिका पर अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चुनाव से पहले या बाद में मुफ्त उपहार देना राजनीतिक दलों का नीतिगत फैसला है। वह राज्य की नीतियों और पार्टियों की ओर से लिए गए फैसलों को नियंत्रित नहीं कर सकता। आयोग ने कहा कि इस तरह की नीतियों का क्या नकारात्मक असर होता है? ये आर्थिक रूप से व्यवहारिक हैं या नहीं? ये फैसला करना वोटरों का काम है। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा था कि चुनाव से पहले या बाद में किसी भी मुफ्त सेवा की पेशकश/वितरण संबंधित पार्टी का एक नीतिगत निर्णय है और क्या ऐसी नीतियां आर्थिक रूप से व्यवहारिक हैं या राज्य के आर्थिक स्वास्थ्य पर इसका उल्टा असर पड़ता है, इस सवाल पर राज्य के मतदाताओं को विचार कर निर्णय लेना चाहिए।
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चुनाव आयोग ने यह हलफनामा वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका के जवाब में दाखिल किया था। याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव से पहले सार्वजनिक धन से तर्कहीन मुफ्त का वादा या वितरण एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की जड़ों को हिलाता है। चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता को खराब करता है। दलों पर शर्त लगाई जानी चाहिए कि वे सार्वजनिक कोष से चीजें मुफ्त देने का वादा या वितरण नहीं करेंगे।