फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Hearing on petitions against laws related to conversion in states January 2 read important news

Supreme Court: राज्यों में धर्मांतरण से जुड़े कानूनों के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई 2 जनवरी को, पढ़ें अहम खबरें

Tue, 27 Dec 2022 08:06 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 27 Dec 2022 08:06 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर भी सुनवाई करेगा, जिसे उसने पिछले साल याचिकाओं में पक्ष बनने मति दी थी। संगठन ने दावा किया था कि देशभर में इन कानूनों के तहत बड़ी संख्या में मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है।

विज्ञापन
Supreme Court Hearing on petitions against laws related to conversion in states January 2 read important news
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने वाले राज्यों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट दो जनवरी को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ अधिवक्ता विशाल ठाकरे और एनजीओ ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर भी सुनवाई करेगा, जिसे उसने पिछले साल याचिकाओं में पक्ष बनने की अनुमति दी थी। संगठन ने दावा किया था कि देशभर में इन कानूनों के तहत बड़ी संख्या में मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है।

विज्ञापन


शीर्ष कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक केंद्र या किसी राज्य ने कोई जवाब नहीं दिया है, जिन्हें वाद में पक्ष बनाया गया है। शीर्ष कोर्ट ने 17 फरवरी 2021 को एनजीओ को अनुमति दी थी कि हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश को उसकी लंबित याचिका में पक्षकार बनाया जाए। इस याचिका के माध्यम से अंतरधार्मिक विवाहों के कारण धर्मांतरण पर नियंत्रण वाले राज्यों के विवादास्पद कानूनों को चुनौती दी गई है।
विज्ञापन


शीर्ष कोर्ट ने छह जनवरी 2021 को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के ऐसे कुछ नए कानूनों का परीक्षण करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, उसने कानूनों के विवादास्पद प्रावधानों पर रोक लगाने से मना कर दिया था। याचिकाओं पर हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को नोटिस जारी किए थे। एनजीओ ने पिछली सुनवाई में कहा था कि हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों को उसकी याचिका में पक्षकार बनाया जाए, क्योंकि उन्होंने भी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर कानून बनाए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

आयोग बनाने के केंद्र के फैसले को चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत उन लोगों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने के विषय पर गौर करने के लिए पूर्व प्रधान न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया गया है। वे लोग दावा करते हैं कि वे मूलत: अनुसूचित जाति से हैं, लेकिन उन्होंने ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लिया है। संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 (समय-समय पर संशोधित) में कहा गया है कि हिंदू या सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा कोई अन्य धर्म मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता है। वकील प्रताप बाबूराव पंडित द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि वह महार समुदाय से संबंधित हैं और अनुसूचित जाति के ईसाई हैं। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि केंद्र सरकार ने वर्षों तक कई आयोगों का गठन किया है और एक नए आयोग के गठन से उच्चतम न्यायालय में इस मुद्दे की सुनवाई में और देरी होगी।

चुनाव सुधार संबंधी याचिका पर दो जनवरी को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट चुनाव सुधारों पर 2018 में जारी अपने निर्देश का अनुपालन नहीं करने को लेकर कानून एवं न्याय मंत्रालय में विधायी विभाग के एक सचिव के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का अनुरोध करने वाली एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली पीठ अब दो जनवरी को इस विषय की सुनवाई करेगी। पीठ ने 11 नवंबर को सचिव को नोटिस जारी किया था। एनजीओ लोक प्रहरी की ओर से खुद पेश हुए याचिकाकर्ता एस.एन. शुक्ला ने अपनी अवमानना याचिका में दलील दी है कि 16 फरवरी 2018 को शीर्ष न्यायालय में कई निर्देश जारी किये थे, लेकिन बगैर किसी वैध या बाध्यकारी कारणों को लेकर उनका अनुपालन नहीं किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed