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जासूसी कांड: पेगासस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गंभीर, याचिकाकर्ताओं से कहा- अपनी याचिका की प्रति केंद्र को सौंपे

Thu, 05 Aug 2021 12:16 PM IST
संजीव कुमार झा राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 05 Aug 2021 12:16 PM IST
सार

पेगासस जासूसी कांड पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अब इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर बताते हुए याचिकाकर्ताओं को याचिकाओं की प्रति केंद्र सरकार को सौंपने को कहा है।

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Supreme court hearing on Pegasus spyware case on thursday 5 august
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पेगासस जासूसी के बारे में मीडिया रिपोर्ट अगर सच है तो ये गंभीर मामला है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से केंद्र सरकार को अपनी याचिका की प्रतियां देने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि जासूसी से प्रभावित व्यक्तियों द्वारा इस अदालत का दरवाजा खटखटाने से पहले पुलिस के पास आपराधिक शिकायत दर्ज करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। 

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चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र सरकार को याचिकाओं की प्रतियां देने के लिए कहा और मामले को मंगलवार को आगे की सुनवाई के लिए टाल दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में केंद्र सरकार को औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा, 'अगर मीडिया में रिपोर्ट सही है तो आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। मैं यह भी नहीं कहना चाहता कि दलीलों में कुछ भी नहीं है। हम यह भी नहीं कह रहे हैं कि कुछ याचिकाकर्ता इससे प्रभावित नहीं हुए हैं। कुछ का दावा है कि उनके फोन हैक हो गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि उन्होंने आपराधिक शिकायत दर्ज करने का प्रयास क्यों नहीं किया।' शीर्ष अदालत पेगासस जासूसी मामले की जांच की मांग वाली नौ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। 
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याचिकाकर्ता वरिष्ठ पत्रकार एन राम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पेगासस को एक 'दुष्ट तकनीक' बताते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय हित को भेद करने तकनीक है। इसके जरिए हमारी जानकारी के बिना हमारे जीवन में घुसपैठ की गई है। फोन के जरिए हमारे जीवन में प्रवेश किया गया। यह गोपनीयता, मानवीय गरिमा और हमारे गणराज्य पर हमला है।
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चीफ जस्टिस ने सभी याचिकाकर्ताओं से यह भी सवाल किया कि यह मुद्दा 2019 में सामने आया था लेकिन तब कोई गंभीर चिंता क्यों नहीं जताई गई थी? चीफ जस्टिस ने यह भी कहा, 'जिन लोगों को रिट याचिकाएं दायर की हैं वे अधिक जानकार और साधन संपन्न हैं। उन्हें अधिक इस मामले में सामग्री जुटाने के लिए और अधिक मेहनत करनी चाहिए थी।

इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से सिब्बल के अलावा वरिष्ठ वकील श्याम दीवान अरविंद अत्तार राकेश द्वेदी शिव सिंह मीनाक्षी अरोड़ा सहित कई वकील पेश हुए। हालांकि गुरुवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कोई भी लॉ ऑफिसर कोर्ट में उपस्थित नहीं थे ।

कोर्ट ने पूछा...पेगासस की खरीद में क्या राज्य सरकारें भी शामिल हैं

जासूसी कांड की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से पूछा, क्या केंद्र सरकार द्वारा पेगासस की खरीद में राज्य सरकारें भी शामिल हैं। इस पर सिब्बल ने कहा कि उनकी समझ में केवल केंद्र सरकार ही स्पाइवेयर खरीद सकती है। पीठ ने यह भी सवाल किया, आपने अब तक एफआईआर क्यों नहीं की?

पीठ ने कहा, आपने अब तक यह नहीं बताया कि रिपोर्ट आने के दो वर्ष बाद आप क्यों आए। सिब्बल ने कहा, हमें आज (बृहस्पतिवार) सुबह ही अदालत के कुछ अधिकारियों व  न्यायपालिका के एक सदस्य के मोबाइल नंबर की जासूसी की जानकारी मिली है। हम पहले याचिका कैसे दायर कर सकते थे? इस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण ने कहा, सच्चाई सामने आनी चाहिए। हम नहीं जानते वे कौन हैं।

उधर, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने पीठ को बताया कि नवंबर, 2019 में पेगासस के उपयोग पर संसद में सवाल उठाया गया था। तब तत्कालीन आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बयान दिया था कि ऐसा नहीं है। इस पर पीठ ने कहा, हमारे पास आसान सवाल है। अगर आपको मालूम था कि आपका फोन हैक हो गया है, तो आपके पास प्राथमिकी दर्ज करने का विकल्प है। आपने ऐसा क्यों नहीं किया? एक घंटे चली सुनवाई में सिब्बल और अरोड़ा के अलावा श्याम दीवान, राकेश द्विवेदी, सीयू सिंह, अरविंद दत्तार वरिष्ठ वकील भी पेश हुए।

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