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NEET मुद्दे पर राज्य में नहीं होना चाहिए धरना-प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Sep 2017 05:25 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार को सुनिश्चित करने के लिए कहा है की नीट परीक्षा के मुद्दे पर राज्य में किसी तरह का धरना-प्रदर्शन न होने पाए। कोर्ट ने नीट के खिलाफ आवाज उठाने वाली छात्रा के सुसाइड के बाद छात्रों द्वारा किए जा रहे धरने प्रदर्शन के बाद यह सुनवाई की। इस मुद्दे पर छात्रों ने आंदोलन भी किया है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि 'सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस मुद्दे पर किसी तरह का धरना-प्रदर्शन न हो, जिससे आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हो अगर ऐसा होता है तो उचित कानून के तहत कार्रवाई की जाने चाहिए।'
बता दें कि मेडिकल में एडमिशन का सपना देखने वाली छात्रा अनीथा ने आत्महत्या कर ली थी, उसके पिता का कहना है कि वह काफी मुश्किल परिस्थितियों में नेशनल इलिजबिलिटी इंट्रेंस टेस्ट (NEET) की तैयारी कर रही थी। गौरतलब है कि अनीथा ने ही सुप्रीम कोर्ट में मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए एनईईटी को अनिवार्य करने के लिए खिलाफ याचिका दायर की थी।
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पढ़ें- NEET मामला: सुसाइड करने वाली छात्रा के पिता ने ठुकराए सरकार के 7 लाख
अनीथा डॉक्टर बनना चाहती थी और उसने 12वीं में 1200 में से 1176 अंक हासिल किए थे। उसने इंजीनियरिंग के लिए 200 में से 199.75 और मेडिकल के लिए 196.75 अंक प्राप्त किए थे। जिस कारण उसे बिना एनईईटी के ही किसी भी स्ट्रीम में एडमिशन मिल सकता था।
हालांकि एनईईटी में उसका स्कोर 86 परसेंटाइल था। जिसके बाद उसने एनईईटी लागू करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अनीथा के परिवार का कहना है कि उसने इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमीशन लेने से मना कर दिया था, क्योंकि वह एक डॉक्टर बनना चाहती थी।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि 'सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस मुद्दे पर किसी तरह का धरना-प्रदर्शन न हो, जिससे आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हो अगर ऐसा होता है तो उचित कानून के तहत कार्रवाई की जाने चाहिए।'
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बता दें कि मेडिकल में एडमिशन का सपना देखने वाली छात्रा अनीथा ने आत्महत्या कर ली थी, उसके पिता का कहना है कि वह काफी मुश्किल परिस्थितियों में नेशनल इलिजबिलिटी इंट्रेंस टेस्ट (NEET) की तैयारी कर रही थी। गौरतलब है कि अनीथा ने ही सुप्रीम कोर्ट में मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए एनईईटी को अनिवार्य करने के लिए खिलाफ याचिका दायर की थी।
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पढ़ें- NEET मामला: सुसाइड करने वाली छात्रा के पिता ने ठुकराए सरकार के 7 लाख
अनीथा डॉक्टर बनना चाहती थी और उसने 12वीं में 1200 में से 1176 अंक हासिल किए थे। उसने इंजीनियरिंग के लिए 200 में से 199.75 और मेडिकल के लिए 196.75 अंक प्राप्त किए थे। जिस कारण उसे बिना एनईईटी के ही किसी भी स्ट्रीम में एडमिशन मिल सकता था।
हालांकि एनईईटी में उसका स्कोर 86 परसेंटाइल था। जिसके बाद उसने एनईईटी लागू करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अनीथा के परिवार का कहना है कि उसने इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमीशन लेने से मना कर दिया था, क्योंकि वह एक डॉक्टर बनना चाहती थी।
कुछ दिन पहले ही उसके पिता ने सरकार की ओर से मदद के रूप में दिया गया चेक वापिस कर दिया था।