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Supreme Court: हर बूथ पर मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के आदेश के खिलाफ 'सुप्रीम' सुनवाई; चुनाव आयोग से मांगा जवाब

Mon, 02 Dec 2024 12:20 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 02 Dec 2024 12:20 PM IST
सार

इंदुप्रकाश सिंह ने याचिका में दावा किया कि वोटर्स की संख्या बढ़ाने वाला फैसला मनमाना है, जो किसी तर्कपूर्ण डाटा पर आधारित नहीं है। आयोग ने अगस्त, 2024 में जारी दो आदेशों के जरिए पूरे देश में बूथों पर मतदाताओं की संख्या बढ़ाने का फैसला किया था। पीठ ने अब जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए इसे 27 जनवरी, 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किया है।

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Supreme Court Hearing on Decision to Increase the Number of Voters per Booth News in Hindi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1,200 से बढ़ाकर 1,500 करने के फैसले के खिलाफ जनहित याचिका पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसमें प्रति मतदान केंद्र मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1,200 से बढ़ाकर 1,500 करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। आयोग ने अगस्त, 2024 में जारी दो आदेशों के जरिए पूरे देश में बूथों पर मतदाताओं की संख्या बढ़ाने का फैसला किया था।

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आयोग के इस फैसले को इंदुप्रकाश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल के जरिए चुनौती दी, जिस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने विचार किया। इंदुप्रकाश सिंह ने याचिका में दावा किया कि वोटर्स की संख्या बढ़ाने वाला फैसला मनमाना है, जो किसी तर्कपूर्ण डाटा पर आधारित नहीं है। इससे पहले 24 अक्तूबर को शीर्ष कोर्ट ने याचिका पर आयोग को कोई नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया था, लेकिन इंदुप्रकाश सिंह को अनुमति दी थी कि वह आयोग के स्थायी वकील को याचिका की प्रति मुहैया करा दें, ताकि इस मुद्दे पर आयोग का पक्ष जाना जा सके।
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पीठ ने क्या कहा?
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह को इस फैसले के तर्क को स्पष्ट करते हुए हलफनामा दायर करने को कहा। इससे पहले कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा है कि वे एक संक्षिप्त हलफनामे के जरिए स्थिति स्पष्ट करेंगे। ऐसे में हलफनामा तीन सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए। पीठ ने कहा कि वह चिंतित है। किसी भी मतदाता को इससे वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
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चुनाव आयोग की दलील
निर्वाचन आयोग ने कहा कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में मतदाताओं की कुल संख्या बढ़ाते समय राजनीतिक दलों से परामर्श किया जाता है। मतदाताओं को निर्धारित समय के बाद भी वोट डालने की अनुमति दी जाती है। पीठ ने अब जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए इसे 27 जनवरी, 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किया है।

सुप्रीम कोर्ट से YSRCP के सोशल मीडिया प्रमुख को बड़ी राहत

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया प्रभारी सज्जला भार्गव रेड्डी को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन्हें दो सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया, ताकि वह आंध्र प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज कई एफआईआर को रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय जा सकें। सज्जला भार्गव रेड्डी की याचिका पर कई एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, हम उच्च न्यायालयों को दरकिनार नहीं करना चाहते हैं और वे संवैधानिक न्यायालय हैं। हमें किसी के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है और अगर गलत हुआ है तो उन्हें कानून का सामना करना होगा।

पीठ ने आदेश दिया, हम उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता के साथ रिट याचिका का निपटारा करते हैं। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि उच्च न्यायालय उचित आदेश पारित करने से पहले दोनों पक्षों को सुनेगा। हमने गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। इसमें कहा गया है, चूंकि याचिकाकर्ता को अपनी तत्काल गिरफ्तारी की आशंका है, जिससे वह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने में असमर्थ हो सकता है, इसलिए हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर दो सप्ताह तक रोक लगाई जाए, ताकि वह उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने 'विवादास्पद' नौकरी नियुक्ति पर केरल सरकार की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल हाई कोर्ट के 2021 के उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें दिवंगत सीपीआई(एम) विधायक के के रामचंद्रन नायर के बेटे आर प्रशांत को सरकारी नौकरी देने के राज्य कैबिनेट के फैसले को अमान्य करार दिया गया था।

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार को झटका देते हुए मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की केरल सरकार की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, पीठ ने मामूली राहत देते हुए कहा कि 2018 में नियुक्ति के बाद से हाई कोर्ट के रद्द करने के आदेश तक पीडब्ल्यूडी में सहायक अभियंता के तौर पर प्रशांत को मिलने वाले वेतन और अन्य लाभों की मांग नहीं की जाएगी। 2021 में, उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि नियुक्ति असंवैधानिक थी, जिसमें कहा गया था कि विधायक को उनके निर्वाचित पांच साल के कार्यकाल के कारण सरकारी कर्मचारी नहीं माना जाता है।
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