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अयोध्या केस: 14 मार्च को अगली सुनवाई, SC का आदेश- दो हफ्ते में जमा कराएं अंग्रेजी दस्तावेज

Thu, 08 Feb 2018 09:43 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 08 Feb 2018 09:43 PM IST
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supreme court hearing on ayodhya issue ram temple CM yogi adityanath
सुप्रीम कोर्ट

दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद का काम पूरा न हो पाने के कारण बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद की सुनवाई गुरुवार को एक बार फिर टल गई। 14 मार्च को सुनवाई की अगली तारीख लगाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा है कि एक बार सुनवाई शुरू हुई तो वह चलती रहेगी। 

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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने साथ ही यह स्पष्ट किया कि वह सिर्फ भूमि विवाद मसले पर ही सुनवाई करेगी। 
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पीठ ने यह संदेश दिया है कि इस मसले पर धार्मिक, आस्था और  राजनीतिक दलीले सुनने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है। साथ ही पीठ ने इस मामले की सुनवाई रोजाना करने के आग्रह पर कोई ध्यान नहीं दिया लेकिन यह जरूर कहा कि एक बार सुनवाई शुरू हुई तो यह चलती रहेगी। वास्तव में मुस्लिम समुदाय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने पीठ से गुहार की कि मामले की सुनवाई रोजाना की जाए। उनका यह पक्ष पिछली सुनवाई के रुख से बिल्कुल विपरीत है। 
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पिछली सुनवाई में उनकी ओर से कहा गया कि मामले की सुनवाई जुलाई 2019 के बाद की जाए। धवन द्वारा मामले की रोजाना सुनवाई करने के आग्रह पर चीफ जस्टिस ने कहा, ‘700 से अधिक गरीब वादियों को न्याय का इंतजार है। हमें उन्हें भी सुनना है।’

अन्य की दखल याचिका पर फिलहाल विचार नहीं

supreme court hearing on ayodhya issue ram temple CM yogi adityanath

पीठ ने सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामजन्मभूमि न्यास, रामलल्ला विरजमान सहित अन्य पक्षकारों को रामायण, रामचरित्र मानस, गीता सहित अन्य किताबों के संबंधित हिस्सों के अंग्रेजी में अनुवाद का काम दो हफ्ते के भीतर पूरा करने के लिए कहा है।

इससे पहले सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कहा गया कि रामायण, रामचरित्र मानस, गीता  सहित दस ऐसी किताबें हैं, जिन्हें हिन्दू पक्षकारों ने आधार बनाया है। चूंकि ये किताबें हिंदी, पाली, संस्कृत, अवधी आदि भाषाओं में है ऐसे में इन किताबों के संबंधित हिस्सों का अनुवाद जरूरी है।
 
वहीं उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उनके हिस्से के दस्तावेजों के अनुवाद का काम पूरा हो चुका है और हमने वह दाखिल कर दिया है। उन्होंने बताया कि 504 दस्तावेजों का अनुवाद हो चुका है। 87 गवाहों के बयान केरिकार्ड भी पेश कर दी गई है। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी पेश कर दी गई है।

साथ ही पीठ ने इस मामले में श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन और तीस्ता सीतलवाड़ समेत अन्य की दखल याचिका पर फिलहाल विचार करने के इनकार कर दिया। 

पीठ ने कहा कि पहले वह मुख्य पक्षकारों की दलीलों को सुना जाएगा। जरूरत हुई तो भविष्य में उनका पक्ष भी सुना जाएगा। पीठ ने कहा ‘हम इस मामले को पूरी तरह से एक भूमि विवाद के रूप में देखेंगे। इसमें कई वादी-प्रतिवादी है। पिछली बार भी हमनें कहा था कि हम किसी दखल याचिका को नहीं स्वीकार कर रहे।’

सुनाई के दौरान धवन ने कहा कि इस मामले में कई चीजें हैं। सबसे मूल बात यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से हमें चोट पहुंची है। इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा सुनवाई के दौरान इस तरह की अतिशयोक्ति से दूर रहना चाहिए। 

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