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मुजफ्फरपुर: बालिका गृह कांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हटाई मीडिया रिपोर्टिंग पर लगी रोक

Thu, 20 Sep 2018 04:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 20 Sep 2018 04:39 PM IST
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Supreme Court hearing in Muzaffarpur Shelter home case, media reporting ban suspended
उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन शोषण कांड में मीडिया रिपोर्टिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। इस कांड में आश्रय गृह की अनेक लड़कियों का कथित रूप से बलात्कार और यौन शोषण हुआ था।
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इस टिप्पणी के साथ ही इस मामले की जांच के बारे में मीडिया रिपोर्टिंग पर पटना उच्च न्यायालय द्वारा 23 अगस्त को लगाई गयी रोक हटा दी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया से कहा कि वे यौन शोषण और यौन हिंसा की घटनाओं को सनसनीखेज नहीं बनायें।
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इस आश्रय गृह में लड़कियों के कथित बलात्कार और यौन शोषण की घटनायें टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइसेंस (टिस) के आडिट में सामने आयी। टिस में राज्य के समाज कल्याण विभाग को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इन घटनाओं का जिक्र किया था।
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राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित गैर सरकारी संगठन के आश्रय गृह में लड़कियों के बलात्कार और उनके यौन शोषण की घटनाओं की अब सीबीआई जांच कर रही है।

Supreme Court hearing in Muzaffarpur Shelter home case, media reporting ban suspended

उच्चतम न्यायालय ने मुजफ्फपुर आश्रय गृह यौन शोषण कांड से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को बिहार पुलिस से कहा कि भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद होने के मामले में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा से पूछताछ की जाये। मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन शोषण मामले के बीच, वर्मा को बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस आश्रय गृह में कई महिलाओं से बलात्कार हुआ था।

इस मामले की जांच की प्रगति के बारे में सीबीआई की रिपोर्ट पढ़ने के बाद शीर्ष अदालत ने यह आदेश दिया। इस रिपोर्ट में कहा गया कि चंद्रशेखर वर्मा और उनकी पत्नी के कब्जे में बड़ी मात्रा में गैरकानूनी हथियार थे। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘हम स्थानीय पुलिस से इस मामले पर गौर करने की उम्मीद करते हैं।’’ 

पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जांच सही दिशा में चल रही है। पीठ ने आयकर विभाग से उस गैर सरकारी संगठन तथा इसके मालिक ब्रजेश ठाकुर की संपत्तियों पर गौर करने को भी कहा जो आश्रय गृह संचालित करता है। पीठ ने राज्य सरकार को आश्रय गृह से आठ लड़कियों को स्थानांतरित करने के मामले में एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई को चार सप्ताह के भीतर इस मामले की जांच पर अगली स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दायर करने का भी निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने 18 सितंबर को इस मामले की जांच के लिए नई सीबीआई टीम गठित करने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने कहा था कि ऐसा करना न सिर्फ अब तक की जांच बल्कि पीड़ितों के लिये भी नुकसानदेह होगा। 

उच्च न्यायालय ने 29 अगस्त को आदेश दिया था कि इस मामले में सीबीआई के विशेष निदेशक द्वारा जांचकर्ताओं की नई टीम गठित की जाए। यह मामला बिहार के मुजफ्फरपुर में एक एनजीओ द्वारा संचालित आश्रय गृह में महिलाओं के कथित बलात्कार और यौन शोषण की घटनाओं से जुड़ा मामला है। इस मामले में ठाकुर सहित 11 लोगों के खिलाफ 31 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गयी थी। इनपुट: भाषा

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