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Supreme Court: 'उल्लंघन के ब्योरे बगैर उद्योग बंद करने से प्रभावित होता है निवेश'; शीर्ष कोर्ट ने की टिप्पणी

Fri, 23 Feb 2024 05:56 AM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 23 Feb 2024 05:56 AM IST
सार

 शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु के थूथुकुडी में वेदांत समूह की कंपनी स्टरलाइट कॉपर के संयंत्र को बंद करने के खिलाफ समूह की याचिका पर सुनवाई की।

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Supreme Court heard Vedanta group plea against the closure of  Sterlite Copper's plant in Thoothukudi
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट शर्तों में उल्लंघन निर्दिष्ट किए बिना किसी उद्योग को बंद करने से कंपनी में किए गए निवेश पर असर पड़ता है। शीर्ष अदालत तमिलनाडु के थूथुकुडी में वेदांत समूह की कंपनी स्टरलाइट कॉपर के संयंत्र को बंद करने के खिलाफ समूह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि अधिकारियों को किसी उद्योग को बंद करने के लिए उल्लंघनों का स्पष्ट ब्योरा देना होगा। तमिलनाडु के वकील सीएस वैद्यनाथन ने स्पष्ट किया कि राज्य ने तांबा संयंत्र को बंद नहीं किया है, बल्कि केवल पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण इसे संचालित करने की सहमति देने से मना किया है। पीठ ने कहा कि कोई कंपनी यह नहीं कह सकती कि वह सिर्फ उन्हीं प्रावधानों का अनुपालन करेगी जिनके बारे में अधिकारियों ने बताया है। इसे जल अधिनियम या जो भी कानून लागू हो उसका अनुपालन करना होगा।
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सामुदायिक रसोई खोलने पर निर्देश देने से किया इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने भूख और कुपोषण से निपटने के सिलसिले में सामुदायिक रसोई खोलने संबंधी याचिका पर कोई निर्देश जारी करने से इन्कार कर दिया। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्थल की पीठ ने कहा कि वैकल्पिक कल्याणकारी योजनाओं का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों पर निर्भर करता है। पीठ ने कहा, लोगों के लिए किफायती मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में भोजन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्यों की ओर से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और अन्य कल्याणकारी योजनाएं लागू हैं। 
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हम इस संबंध में कोई और निर्देश जारी नहीं करना चाहते। हम वैकल्पिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर छोड़ते हैं। शीर्ष अदालत सामाजिक कार्यकर्ताओं अनुज धवन व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को भूख और कुपोषण से निपटने के सिलसिले में सामुदायिक रसोई खोलने के लिए योजना बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

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