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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court grants bail to four convicts of 2002 Naroda Patiya case  

नरोदा पाटिया केस : सुप्रीम कोर्ट ने कहा सजा पर फिलहाल संदेह, चार दोषियों को दी जमानत

Wed, 23 Jan 2019 11:11 AM IST
sapna singla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: sapna singla Updated Wed, 23 Jan 2019 11:11 AM IST
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Supreme Court grants bail to four convicts of 2002 Naroda Patiya case  
supreme court - फोटो : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2002 के नरोदा पाटिया मामले से जुड़े चार दोषियों को जमानत दे दी है। चारों दोषियों के नाम उमेशभाई भारवद, राजकुमार, हरशद और प्रकाशभाई राठौड़ है। इस दंगा मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इनकी सजा पर फिलहाल संदेह है।


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इन चारों आरोपियों को हाई कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा कि बजरंगदल के नेता बाबू बजरंगी और अन्य की अपील भी स्वीकार कर ली गई है। 

मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने माया कोडनानी को बरी कर दिया था। वहीं बाबू बजरंगी की सजा को बरकरार रखा गया। गुजरात हाई कोर्ट ने नरोदा दंगा पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
 
मामले में 32 दोषियों में से गुजरात हाईकोर्ट ने माया कोडनानी सहित 17 लोगों को बरी कर दिया था। वहीं 12 की सजा को बरकरार रखा था। बता दें कि इनमें से एक आरोपी की मौत हो गई है। बीते साल न्यायमूर्ति हर्षा देवानी और न्यायमूर्ति ए एस सुपेहिया की पीठ ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अगस्त में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।



2012 में आजीवन कारावास की सजा

साल 2012 में अगस्त में एसआईटी मामलों के लिये विशेष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी समेत 32 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

क्या है मामला?

नरोदा पाटिया दंगा 2002 के गुजरात में हुए दंगों में के उन मुख्य मामलों में से एक है, जिनमें करीब 97 लोगों की मौत हुई थी। गुजरात दंगे के 9 ऐसे मुख्य मामले तय किए गए थे, जिनकी सुनवाई एसआईटी की विशेष अदालत ने की। नरोदा के दंगों में अल्पसंख्यक समुदाय के करीब 11 लोगों की जान चली गई थी।
 
ये दंगे 28 फरवरी 2002 को हुए थे, जिसमें करीब 33 लोग भी घायल हुए। बता दें कि नरोदा केस का मुकदमा अगस्त 2009 में शुरू हुआ, जहां करीब 62 लोगों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए। इसके बाद अदालत ने माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को दंगा भड़काने का दोषी करार दिया था।

इनके साथ 32 और लोग दोषी पाए गए थे। जिसमें बाद में अभियुक्त बनाए गए 29 लोगों को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने माया कोडनानी को 31 अगस्त 2012 को 28 साल की सजा सुनाई थी, लेकिन उसके बाद उन्हें उच्च अदालत से जमानत मिल गई। बता दें कि माया कोडनानी दंगों के बाद भी साल 2002 और 2007 में नरोदा से ही विधायक बन चुकी हैं, साथ ही वे गुजरात सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं।

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