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SC: 770 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में आरोपी को जमानत, 6.5 साल से जेल में बंद, केस में ट्रायल तक नहीं शुरू हुआ

Wed, 04 Dec 2024 02:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 04 Dec 2024 02:02 PM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिंदल पर जिन अपराधों के तहत आरोप लगे हैं, वह सभी गंभीर हैं, लेकिन इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वह काफी वर्षों से जेल में बंद हैं और मामले में कोई सुनवाई भी नहीं हुई है।

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Supreme Court gives bail to SRS group head in Rs 770 cr fraud case imposes strict bail conditions news updates
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल को 770 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में जमानत दे दी। जिंदल के खिलाफ गंभीर घोखाधड़ी जांच दफ्तर की तरफ से जांच की जा रही है।
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चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने पाया कि अनिल जिंदल पिछले 6.5 साल से जेल में बंद हैं और उनके मामले में अब तक ट्रायल भी नहीं शुरू हुआ। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिंदल पर जिन अपराधों के तहत आरोप लगे हैं, वह सभी गंभीर हैं, लेकिन इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वह काफी वर्षों से जेल में बंद हैं और मामले में कोई सुनवाई भी नहीं हुई है।
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बेंच ने कहा कि जिंदल को इस मामले में दोषी पाए जाने पर 10 साल की जेल की सजा हो सकती है। जमानत देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जिंदल के लिए सख्त शर्तों का एलान किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि वह अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट के पास सरेंडर करें और अपना कॉन्टैक्ट नंबर एसएफआईओ को दें, ताकि जांच कर रहे अधिकारी उनके बारे में हर वक्त जानकारी रख सकें।
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बेंच ने कहा कि जिंदल को अपनी अचल संपत्तियों, बैंक अकाउंट्स (व्यक्तिगत या संयुक्त) की जानकारी भी ट्रायल कोर्ट को देनी होगी। उन्हें यह भी निर्देश दिया गया कि अगर वह नया खाता खोलते हैं तो उन्हें इसकी जानकारी ट्रायल कोर्ट को देनी होगी। 

सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपी को अपनी संपत्ति को न बेचने की भी हिदायत दी। बेंच ने कहा कि ट्रायल कोर्ट, जो कि इस मामले में फास्ट ट्रैक कार्यवाही करेगी, वह जिंदल पर जमानत की और शर्तें लगा सकती है। 

इससे पहले बेंच ने जिंदल की याचिका पर एसएफआईओ को नोटिस जारी किया था। बेंच ने कहा था, ‘‘इसमें कितनी रकम शामिल है? 770 करोड़ रुपये, हम समझते हैं कि जमानत नियम है, जेल नहीं, लेकिन कुछ अपवाद भी होने चाहिए। वह 770 करोड़ रुपये की ठगी करके यह नहीं कह सकते कि 'अब तीन साल बाद मुझे जमानत मिल जाएगी'। मुकदमे को पूरा होने में 20 साल लगेंगे।’’

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द की थी जमानत
इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी को निचली अदालत से मिली जमानत इसी साल 30 अप्रैल को रद्द कर दी थी। एसआरएस समूह के खिलाफ एसएफआईओ मामला कर्ज हासिल करने के लिए बैलेंस शीट और वित्तीय दस्तावेजों में गड़बड़ी करने और बैंकों के सामने गलत तथ्य पेश करने के आरोपों के इर्द-गिर्द है।

इस समूह पर आरोप है कि उसने बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने के बाद उस रकम की हेराफेरी की। जिंदल पर आरोप है कि समूह के अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने गलत दस्तावेजों से कर्ज लेने समेत कथित गतिविधियों की रूपरेखा तय की थी। एसआरएस समूह सोने, जेवर, संपदा आदि का कारोबार करता है।

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