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अब अनुच्छेद 370 पर संविधान पीठ में सुनवाई, येचुरी को श्रीनगर जाने की मिली सशर्त इजाजत

Wed, 28 Aug 2019 12:38 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Wed, 28 Aug 2019 12:38 PM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया।
  • अक्तूबर के पहले हफ्ते में 5 जजों की संवैधानिक बेंच करेगी अनुच्छेद 370 के हटाए जाने से जुड़ी सभी याचिकाओं पर सुनवाई।
  • सीपीएम नेता सीताराम येचुरी को जम्मू कश्मीर जाने की मिली इजाजत, मध्यस्थताकर्ता नियुक्त करने की मांग खारिज।
  • इंटरनेट, लैंडलाइन और बाकी संचार माध्यमों की बहाली मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सात दिनों के अंदर मांगा जवाब।

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Supreme court gave permission to sitaram yechury to visit srinagar article 370 petition hearing
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने के खिलाफ और इससे संबंधित दाखिल तमाम याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई कर कई बड़े फैसले लिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया है और कहा है कि पांच जजों की संवैधानिक पीठ अक्तूबर के पहले सप्ताह में इस मामले से संंबंधित सभी याचिकाओं की सुनवाई करेगी।

अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं भेजी गईं संविधान पीठ को


प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ केंद्र की उस दलील से सहमत नहीं दिखी कि अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल के अदालत में मौजूद होने के कारण नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं है। पीठ ने नोटिस को लेकर सीमा पार प्रतिक्रिया होने की दलील को ठुकराते हुए कहा कि हम इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजते हैं।इस पीठ में न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे और न्यायमूर्ति एस. ए. नजीर भी शामिल हैं।

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अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस अदालत द्वारा कही हर बात को संयुक्त राष्ट्र के समक्ष पेश किया जाता है। दोनों पक्ष के वकीलों के वाद-विवाद में उलझने पर पीठ ने कहा कि हमें पता है कि क्या करना है, हमने आदेश पारित कर दिया है और हम इसे बदलने नहीं वाले।

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येचुरी को जम्मू-कश्मीर में तारीगामी से मिलने की इजाजत मिली

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी को उनके पार्टी सहयोगी मोहम्मद यूसुफ तारीगामी से मिलिने के लिए जम्मू-कश्मीर जाने की इजाजत दे दी।  प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की एकल पीठ ने हालांकि येचुरी को निर्देश दिया कि जम्मू कश्मीर जा कर वह सिर्फ तारीगामी से मिलें और अपनी यात्रा का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए न करें। 


पीठ ने कहा कि अगर येचुरी किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि में शामिल होते हैं तो अधिकारी इस बारे में उच्चतम न्यायालय को बताने के लिए स्वतंत्र हैं। 

पत्रकारों पर पाबंदियां हटाने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से, अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के बाद पत्रकारों पर लगाई गई पाबंदियां समाप्त करने की मांग कर रही एक याचिका पर जवाब मांगा। कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन द्वारा दायर की गई याचिका पर नोटिस जारी किया है। पीठ ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से भसीन की याचिका पर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है।

याचिका में भसीन ने मोबाइल इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाओं समेत संचार के सभी माध्यमों को राज्य में बहाल करने के वास्ते निर्देश देने की मांग की है ताकि मीडिया के लिए काम करने का सही वातावरण बन सके।

जामिया के छात्र को अनंतनाग में अपने परिवार से मिलने की अनुमति मिली

उच्चतम न्यायालय ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के एक छात्र को जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में अपने परिवार के पास जाने की बुधवार को अनुमति दे दी। न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस छात्र को समुचित सुरक्षा प्रदान करे। पीठ ने छात्र मोहम्म्द अलीम सैयद को अनंतनाग में अपने परिवार से मिलकर लौटने के बाद न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने पुलिस को इस छात्र को समुचित सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है।

पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े से कहा कि यदि यह छात्र बृहस्पतिवार को अनंतनाग जाना चाहता है तो न्यायालय का आदेश उसे एक घंटे मे उपलब्ध करा दिया जाएगा। 



अधिवक्ता मृगांक प्रभाकर के माध्यम से दायर याचिका में सैयद ने कहा है कि वह अनंतनाग का स्थाई निवासी है और चार-पांच अगस्त से उसे अपने माता पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उसने याचिका में संदेह व्यक्त कि शायद उसके माता पिता को कश्मीर में नजरबंद कर लिया गया है क्योंकि वह उनसे अभी तक किसी भी तरह से संपर्क कायम नहीं कर सका है। 

सैयद ने अपनी याचिका में कहा कि राष्ट्रपति का आदेश जारी होने के बाद से वहां इंटरनेट और फोन सेवा पूरी तरह बंद है। उसने यह भी दलील दी है कि सूचना का ब्लैक आउट और लोगों के आवागमन पर प्रतिबंध संविधान में प्रदत्त् मौलिक अधिकारों का हनन करता है। 

 
साथ ही कोर्ट ने केंद्र की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के लिए वार्ताकार को नियुक्त करने की बात की गई थी। 

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