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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court fixes on issues for adjudication on pleas challenging Centre 10 percent EWS quota

EWS: ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर लगेगी रोक या मिलेगी हरी झंडी? अब इन तीन मुद्दों पर बहस के बाद ही आएगा फैसला

Thu, 08 Sep 2022 02:33 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 08 Sep 2022 02:33 PM IST
सार

EWS आरक्षण की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 13 सितंबर से सुनवाई शुरू करेगा। सुनवाई के लिए तीन सवाल तय किए गए हैं।

 

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Supreme Court fixes on issues for adjudication on pleas challenging Centre 10 percent EWS quota
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को EWS कोटे से मिलने वाले आरक्षण को लेकर 13 सितंबर को सुनवाई होने वाली है। लेकिन उससे पहले आज एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल के तीन सवालों पर मुहर लगा दी है। ये तीन सवाल  इस प्रकार हैं। क्या राज्य सरकारों को आर्थिक आधार पर  आरक्षण देने की शक्ति देते हुए संविधान के मूल ढांचे से छेड़छाड़ की गई है ? क्या राज्यों को निजी गैर सहायता प्राप्त संस्थानों में आरक्षण का विशेष प्रावधान सौंपना संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन है ? और क्या इस संशोधन में SEBC/OBC/SC/ST को EWS आरक्षण से बाहर करना संविधान के मूल ढांचे से छेड़छाड़ है? मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित की अगुआई वाली संविधान पीठ करेगी। हालांकि, खंडपीठ ने कहा है कि ये तीन प्रारंभिक सवाल हैं लेकिन पक्षकार अपनी दलीलों  में अन्य सवाल भी शामिल कर सकते हैं।

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EWS Reservation पर 13 सितंबर को होगी सुनवाई
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग/EWS के उम्मीदवारों को दाखिले तथा नौकरी में दस प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में 13 सितंबर, 2022 से सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बताया कि केन्द्र सरकार के फैसले की संवैधानिक वैधता के संबंध में दाखिल याचिकाओं पर 13 सितंबर से सुनवाई शुरू की जाएगी।
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पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई
केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण संबंधी मामले की सुनवाई पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ करेगी। इस पीठ में  न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी, न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट्ट, न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला भी शामिल हैं।
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जिरह में लगेगा इतना वक्त
प्रधान न्यायाधीश यू यू ललित की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 13 सितंबर से सुनवाई की बात तब कही जब पीठ को बताया गया कि पक्षकारों के वकीलों को जिरह में करीब 18 घंटे का वक्त लगेगा। पीठ ने सभी वकीलों को आश्वस्त किया कि उन्हें जिरह आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे। साथ ही पीठ ने कहा कि वह 40 याचिकाओं पर निर्बाध सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने के वास्ते बृहस्पतिवार को फिर बैठेगी।


103वें संशोधन में मिला आरक्षण
जनवरी, 2019 में संसद में संविधान में 103वें संशोधन को पारित किया गया था। इस संशोधन के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में खंड (6) सम्मिलित करके नौकरियों और शिक्षा में आर्थिक आरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है।

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