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‘सुप्रीम कोर्ट ऐसी जगह नहीं, जहां जब जी चाहे कोई आ जाए’, सरकारी अधिकारियों के अपील दायर करने पर जताई नाराजगी
Mon, 19 Oct 2020 02:07 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 19 Oct 2020 02:07 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई
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सुप्रीम कोर्ट ने अपील दायर करने में सरकारी अधिकारियों द्वारा ज्यादा देरी करने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक समय बर्बाद करने के लिए जुर्माना लगाना चाहिए और इसका भुगतान जिम्मेदार अधिकारियों से वसूला जाना चाहिए।
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जस्टिस एसके कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ऐसी जगह नहीं हो सकती है, जहां अधिकारी समय सीमा की अनदेखी कर जब जी चाहे आ सकें। हमने यह मुद्दा उठाया है कि अगर सरकारी मशीनरी समय से अपील या याचिका दायर करने के नाकाबिल या असमर्थ है तो इसका एक ही समाधान है। हम विधायिका से अनुरोध करेंगे कि अक्षमता के चलते सरकारी अधिकारियों के अपील या याचिका दायर करने की समय सीमा को बढ़ाया जाए।
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पीठ ने मध्यप्रदेश की ओर से 663 दिन की देरी से दायर की गई अपील पर कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने अपने आदेश में कहा जब तक कानून है तब तक अपील तय समय सीमा के भीतर दायर करनी होगी। देरी के क्षमा आवेदन में कहा गया है कि दस्तावेजों की अनुपलब्धता के चलते देरी हुई। हम विस्तृत आदेश लिखने के लिए बाध्य हैं क्योंकि ऐसा लगता है कि सरकारी अधिकारियों पर हमारी सलाह का कोई असर नहीं हुआ।
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