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Supreme Court: 'चुनाव आयोग के अधिकारियों पर अवमानना की कार्यवाही नहीं'; वोटर आईडी फॉर्म से जुड़ी याचिका खारिज
Fri, 09 Feb 2024 10:52 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 09 Feb 2024 10:52 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) बनाने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में बदलाव से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ याचिका खारिज कर दी। मामला 'स्पष्टीकरण' में बदलाव का था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
वोटर आईडी बनाने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में बदलाव न करने से नाराज याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा किया। बदलाव नहीं करने के लिए याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अपील की थी। हालांकि, चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिका अस्वीकार कर दी। इस मामले में पिछले साल सितंबर में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वोटर आईडी धारकों की सूची अपडेट करने के लिए जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को वोटर आईडी बनाने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म के 'स्पष्टीकरण' खंड में बदलाव करने का आश्वासन दिया था। ऐसा न होने पर चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अपील की गई। हालांकि, सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पिछले साल, चुनाव आयोग ने अदालत को बताया था कि मतदाता पहचान पत्र के लिए आधार संख्या (UIDAI) भरना वैकल्पिक है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जी निरंजन ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। निरंजन ने इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की थी। चुनाव आयोग ने अदालत को बताया था कि वोटर आईडी फॉर्म के 'स्पष्टीकरण' खंड में जरूरी बदलाव करेगा। जनहित याचिका में कांग्रेस नेता निरंजन ने मतदाताओं के पंजीकरण (संशोधन) नियम, 2022 के नियम 26बी के तहत बदलाव की मांग की थी।
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अवमानना की अपील पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, कोर्ट ने फॉर्म में बदलाव के लिए चुनाव आयोग के सामने कोई समय सीमा तय नहीं की थी। उन्होंने कहा कि आयोग को चुनाव से पहले बहुत काम करना होगा। अवमानना हमेशा अदालत और कथित तौर पर आदेश का उल्लंघन या अनदेखी करने पर ही होती है। ऐसे में याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा।
बता दें कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में डुप्लीकेट एंट्री को हटाने की पहल के तहत नया नियम लाया था। आयोग ने कहा था कि वोटर आईडी आधार कार्ड से लिंक किए जाएंगे। अदालत में सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग ने कहा था कि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में 66 करोड़ से अधिक आधार नंबर पहले ही अपलोड किए जा चुके हैं।
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गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को वोटर आईडी बनाने के लिए भरे जाने वाले फॉर्म के 'स्पष्टीकरण' खंड में बदलाव करने का आश्वासन दिया था। ऐसा न होने पर चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अपील की गई। हालांकि, सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पिछले साल, चुनाव आयोग ने अदालत को बताया था कि मतदाता पहचान पत्र के लिए आधार संख्या (UIDAI) भरना वैकल्पिक है।
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तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जी निरंजन ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। निरंजन ने इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी दायर की थी। चुनाव आयोग ने अदालत को बताया था कि वोटर आईडी फॉर्म के 'स्पष्टीकरण' खंड में जरूरी बदलाव करेगा। जनहित याचिका में कांग्रेस नेता निरंजन ने मतदाताओं के पंजीकरण (संशोधन) नियम, 2022 के नियम 26बी के तहत बदलाव की मांग की थी।
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अवमानना की अपील पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, कोर्ट ने फॉर्म में बदलाव के लिए चुनाव आयोग के सामने कोई समय सीमा तय नहीं की थी। उन्होंने कहा कि आयोग को चुनाव से पहले बहुत काम करना होगा। अवमानना हमेशा अदालत और कथित तौर पर आदेश का उल्लंघन या अनदेखी करने पर ही होती है। ऐसे में याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा।
बता दें कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में डुप्लीकेट एंट्री को हटाने की पहल के तहत नया नियम लाया था। आयोग ने कहा था कि वोटर आईडी आधार कार्ड से लिंक किए जाएंगे। अदालत में सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग ने कहा था कि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में 66 करोड़ से अधिक आधार नंबर पहले ही अपलोड किए जा चुके हैं।