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सुप्रीम कोर्ट : स्वतंत्रता सेनानियों की तलाकशुदा बेटियों को पेंशन की जागी उम्मीद, केंद्र से पूछा- कितना खर्च आएगा

Sun, 07 Mar 2021 06:04 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sun, 07 Mar 2021 06:04 PM IST
सार

देश के स्वतंत्रता सेनानियों की तलाकशुदा बेटियों को भी परिवार पेंशन मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट इससे संबंधित एक याचिका की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस पर कितना खर्च आएगा, यह बताने को कहा है। 

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Supreme court: divorced daughters of freedom fighters hope for pension, Center will tell how much it will cost
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि अगर स्वतंत्रता सेनानियों की अविवाहित या विधवा बेटियों के अलावा उनकी तलाकशुदा बेटियों को भी परिवार पेंशन दी जाती है तो इस पर कितना वित्तीय बोझ आएगा।
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न्यायमूर्ति यू. यू. ललित और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने यह सवाल तब किया जब केंद्र ने कहा कि अगर अदालत ने स्वतंत्रता सेनानियों की अविवाहित या विधवा बेटियों के अलावा तलाकशुदा बेटियों को भी परिवार पेंशन देने की अनुमति दी तो इस पर वित्तीय बोझ पड़ेगा और नए विवाद शुरू हो जाएंगे। पीठ ने टिप्पणी की कि कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा? तलाकशुदा बेटियों के मामले बहुत कम हैं और इस प्रकार न्यूनतम बोझ आएगा। देश में तलाकशुदा बेटियों की संख्या बहुत ही कम है।
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दो हाईकोर्ट ने दिए अलग-अलग फैसले
शीर्ष अदालत इस मसले पर सुनवाई कर रही थी कि क्या तलाकशुदा बेटियां उसी तरह अपने स्वतंत्रता सेनानी पिता के परिवार पेंशन की हकदार हैं, जिस तरह से अविवाहित या विधवा बेटियां होती हैं। इस मामले में दो अलग-अलग हाईकोर्ट ने अलग-अलग फैसले दिए हैं।
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हिमाचल की तुलसी देवी पहुंची सुप्रीम कोर्ट
हिमाचल प्रदेश की तुलसी देवी (57) ने यह मामला शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाया। उन्होंने  पिछले वर्ष हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी, जिसने इस आधार पर उन्हें स्वतंत्रता सेनानी परिवार पेंशन देने की याचिका खारिज कर दी कि नियमों में ऐसा प्रावधान नहीं है।

पिता ने देश के लिए जीवन कुर्बान किया, तलाकशुदा बेटी को पेंशन क्यों नहीं?
सुनवाई के दौरान तुलसी देवी की तरफ से पेश हुए वकील दुष्यंत पाराशर ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी की तलाकशुदा बेटी को विधवा या अविवाहित बेटी की तरह माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल के पिता ने देश के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया और आय का स्रोत नहीं होने के कारण वह सुगम जीवन नहीं व्यतीत कर पा रही हैं।

केंद्र ने कहा-नए विवाद पैदा होंगे
केंद्र की तरफ से पेश हुईं अतिरिक्त सोलीसीटर जनरल माधवी दीवान ने कहा कि अगर परिवार पेंशन की अनुमति दी जाती है तो इससे वित्तीय बोझ बढ़ेगा और नए विवाद शुरू हो जाएंगे। उन्होंने इस मुद्दे पर और दस्तावेज पेश करने के लिए समय मांगा।


अप्रैल में होगी आगे सुनवाई
शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने की छूट दे दी और मामले का अंतिम निस्तारण उपयुक्त पीठ के समक्ष अप्रैल के दूसरे हफ्ते में करने के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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