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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने दंपती के तलाक को दी मंजूरी, कहा- अहंकार छोड़ें, बच्चे की देखभाल करें

Wed, 20 Aug 2025 05:09 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 20 Aug 2025 05:09 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने एक दंपती की ओर आपसी सहमति से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए तलाक को मंजूरी दी। कोर्ट ने कहा कि अब जब शादी नहीं रही तो अहंकार भी खत्म हो जाना चाहिए और दोनों को अपने बच्चे की देखभाल पर ध्यान देना चाहिए। बच्ची की हिरासत मां को दी गई है, जबकि पिता को हर महीने अपनी बेटी को 50 हजार रुपये देने होंगे। 

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Supreme Court dissolves marriage, says ego should 'vanish'
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक दंपती की शादी को खत्म किया और उन्हें अपने नाबालिग बच्चे की देखभाल करने को कहा। साथ ही शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अब शादी खत्म हो चुकी है, इसलिए उनका अहंकार भी खत्म हो जाना चाहिए।
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न्यायमूर्ति बी वी नागरथना और आर महादेवन की बेंच ने कहा कि वह तलाक देना पसंद नहीं करते, लेकिन जब दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से शादी खत्म करने की याचिका दाखिल की, तो उन्होंने आदेश दिया। बेंच ने अलग हुए दंपती से कहा, अब कोई अहंकार नहीं होना चाहिए। अब शादी नहीं है। शादी में अहंकार होता है। जब शादी खत्म हो गई है, तो अहंकार भी खत्म हो जाना चाहिए। अब बच्चे की देखभाल करें। 
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शीर्ष कोर्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश के खिलाफ महिला की ओर से दायर याचिका की सुनवाई कर रहा था। दोनों पक्षों के वकीलों ने बताया कि अपील की प्रक्रिया के दौरान कई दौर की बातचीत के बाद उन्होंने कुछ शर्तों के साथ आपसी सहमति से तलाक लेने का फैसला किया। 

बेंच ने बच्चे की हिरासत और मिलने के अधिकारों पर ध्यान दिया। कोर्ट ने कहा कि बच्ची की हिरासत मां के पास रहेगी और पिता को मिलने का अधिकार होगा। दोनों पक्षों के साझा आवेदन में भी यही आग्रह किया गया था। पिता अपनी नाबालिग बेटी के लिए हर महीने 50,000 रुपये देंगे। 


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साझा आवेदन में जो समझौते के नियम और शर्तें हैं, वे संविधान के अनुच्छेद 142 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13बी के तहत दायर किए गए हैं। अनुच्छेद 142 कोर्ट को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी मामले में 'पूर्ण न्याय' के लिए आवश्यक आदेश जारी कर सके, जबकि धारा 13बी आपसी सहमति से तलाक से संबंधित है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों से पूछा तो उन्होंने कहा कि वे सभी विवादों को सुलझा चुके हैं और आपसी सहमति से तलाक लेना चाहते हैं। दोनों ने कहा कि वे समझौते की शर्तों का पालन करेंगे। कोर्ट ने कहा कि समझौते की शर्तें कानूनी हैं और उन्हें स्वीकार करने में कोई बाधा नहीं है। इसलिए, कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति को स्वीकार कर लिया।

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