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ICU के लिए एक समान मानक हो: SC स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर, कहा- राज्य तीन हफ्तों में बनाएं एक्शन प्लान
Sat, 25 Apr 2026 02:19 PM IST
Shivam Garg
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shivam Garg
Updated Sat, 25 Apr 2026 02:19 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आईसीयू सेवाओं के लिए जरूरी दिशानिर्देश लागू करने हेतु व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में गहन चिकित्सा इकाइयों (ICU) की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि आईसीयू के लिए तय न्यूनतम मानकों को लागू करने हेतु सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश व्यावहारिक और यथार्थवादी कार्ययोजना तैयार करें।
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शीर्ष अदालत की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन शामिल थे, ने 20 अप्रैल के आदेश में कहा कि गहन देखभाल सेवाओं के संगठन और वितरण के लिए दिशानिर्देश तैयार कर ली गई हैं, जिन पर व्यापक सहमति है। अदालत ने कहा कि ये दिशानिर्देश व्यावहारिक, लागू करने योग्य और आईसीयू के लिए न्यूनतम आवश्यक मानक हैं।
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ठोस कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव या सचिव तत्काल विशेषज्ञों की बैठक बुलाएं और इन दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करें। अदालत ने कहा कि यह योजना जमीन पर लागू होने योग्य और वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए।
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पांच बुनियादी जरूरतों की पहचना कर प्राधमिकता दें
पीठ ने कहा कि शुरुआती चरण में पांच बुनियादी जरूरतों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता दी जाए। इनमें मानव संसाधन, प्रशिक्षित स्टाफ, उपकरण, लॉजिस्टिक्स और जरूरी ढांचे से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे। साथ ही इन मानकों के पालन और निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था भी बनाई जाए।
अदालत ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया तुरंत शुरू होनी चाहिए और पहली बैठक एक सप्ताह के भीतर आयोजित की जाए। संबंधित अधिकारी इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल हों। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा तैयार रिपोर्ट भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग सचिव को भेजी जाएगी, जो उसे सभी राज्यों के साथ साझा करेंगे। इसके बाद एक संयुक्त बैठक कर अंतिम साझा मसौदा तैयार किया जाएगा।
अगली सुनवाई 18 मई को होगी
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को भी निर्देश दिया गया है कि अदालत में पेश दिशानिर्देशों को औपचारिक रूप से एडवाइजरी के रूप में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जारी करे व मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड करे। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई को तय की है।
सुनवाई के दौरान यह सुझाव भी दिया गया कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए नर्सिंग स्टाफ को ICU परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, क्योंकि वही मरीजों के साथ 24 घंटे रहते हैं, जबकि डॉक्टर समय-समय पर विजिट करते हैं। अदालत ने इस सुझाव को व्यावहारिक और जरूरी बताते हुए भारतीय नर्सिंग परिषद और पैरा मेडिकल परिषद को मामले में पक्षकार बनाया है।
कोर्ट ने इन संस्थाओं से कहा है कि वे अगली सुनवाई तक यह योजना पेश करें कि आईसीयू प्रबंधन के लिए नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों तथा प्रशिक्षण प्रणाली को कैसे मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में प्रशिक्षित कर्मी गंभीर मरीजों की बेहतर देखभाल कर सकें।
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