फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme court directs important decision on Motor vehicle act

एमवी अधिनियम: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, दामाद के साथ रहने वाली सास भी मुआवजे के दावे की हकदार  

Mon, 25 Oct 2021 09:01 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 25 Oct 2021 09:01 PM IST
सार

अदालत ने कहा कि एक कानूनी प्रतिनिधि में कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है, जो मृतक की संपत्ति में हस्तक्षेप करता है। ऐसे व्यक्ति का कानूनी उत्तराधिकारी होना जरूरी नहीं है।  

विज्ञापन
Supreme court directs important decision on Motor vehicle act
supreme court - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि सास, दामाद की कानूनी उत्तराधिकारी नहीं हो सकती है लेकिन मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे का दावा करने के लिए उसे उसके कानूनी प्रतिनिधि के रूप में माना जा सकता है। जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस कृष्णा मुरारी की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि भारतीय समाज में सास का बुढ़ापे में अपनी बेटी और दामाद के साथ रहना और अपने भरण-पोषण के लिए अपने दामाद पर निर्भर रहना असामान्य नहीं है। वह कानूनी उत्तराधिकारी नहीं हो सकती है लेकिन दामाद की मृत्यु होने पर वह निश्चित रूप से प्रभावित पक्ष है।

विज्ञापन


पीठ ने कहा है कि ऐसी स्थिति में हमें यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि वह मोटर वाहन अधिनियम की धारा-166 के तहत एक 'कानूनी प्रतिनिधि' है और दावा याचिका दायर करने की हकदार है। शीर्ष अदालत ने केरल हाईकोर्ट के इस विचार से असहमति जताई कि सास कानूनी प्रतिनिधि नहीं हो सकती।  
विज्ञापन


मामला 20 जून, 2011 को एक सड़क दुर्घटना में गणित के प्रोफेसर एन वेणुगोपालन नायर की मौत पर मोटर दुर्घटना न्यायाधिकरण(ट्रिब्यूनल) द्वारा मुआवजा देने से संबंधित है। 52 वर्षीय मृतक अपनी पत्नी, दो बेटियों और सास के साथ रहता था। हाईकोर्ट ने मृतक परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे को कम कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि ट्रिब्यूनल ने निर्भरता मुआवजे का आकलन सही तरीके से नहीं किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील की स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी से पीड़ित परिवार को 85.81 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री स्पष्ट रूप से स्थापित करती है कि सास, मृतक और उसके परिवार के सदस्यों के साथ रह रही थी। वह अपने आश्रय और रखरखाव के लिए दामाद पर निर्भर थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed