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जज लोया केस में जांच का दायरा बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सिर्फ मौत के पहलुओं पर ही सुनवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 03 Feb 2018 01:00 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के विशेष सीबीआई जज बीएच लोया की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की याचिका का दायर बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को शामिल करने से शीर्ष अदालत ने साफ इनकार कर दिया है। राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले का ट्रायल चला रहे जज लोया की मौत एक दिसंबर, 2014 में हुई थी। इस मामले में अमित शाह भी आरोपी थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को नोटिस भेजने से किया इनकार
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि है हम जज लोया की मौत तक ही सीमित रहेंगे। हम इसके साथ किसी और चीज को नहीं जोड़ सकते। पीठ ने यह स्पष्टीकरण तब दिया जब मुंबई के वकील डॉ. जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल ने कहा कि इस मामले में अमित शाह को नोटिस जारी किया जाना चाहिए।
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शुक्रवार को बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि जज लोया की स्वाभाविक मौत हुई थी लेकिन अगर जज लोया की बहन, पिता, पत्नी और बेटे ने अगर स्वाभाविक मौत पर शंका जताई है तो क्यों नहीं इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने पीठ से कहा कि जज लोया के परिवारवालों को बुलाया जाना चाहिए और उनसे चैंबर में बातचीत करनी चाहिए। अगर वे कहते है कि मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए तब उनकी याचिका पर विचार नहीं किया जाए।
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उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के एक पूर्व ने यह दावा किया था कि लोया केपरिवारवालों ने उन्हें बताया था कि जज लोया को अमित शाह की ओर से 100 करोड़ रुपये रिश्वत ऑफर किया गया था। दवे ने यह भी दावा किया केस के रिकॉर्ड में कई विरोधाभास है। उन्होंने कहा कि विशेष अदालत द्वारा शाह को आरोपमुक्त करने को सीबीआई ने चुनौती क्यों नहीं दी गई। जबकि एनके अमीन सहित अन्य पुलिस अधिकारियों को आरोपमुक्त करने की फैसले को चुनौती दी गई।
दवे ने यह भी कहा कि आखिर महाराष्ट्र सरकार जांच से क्यों बचना चाह रही है। मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं। हम एक जज की बात कर रहे हैं जिनकी मौत पर संदेह जताया गया है। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा जांच के आदेश देने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य के खुफिया प्रमुख के समक्ष बयान दर्ज कराने वाले चार जजों को बुलाया जाना चाहिए और उनसे सवाल-जवाब किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस पर सवाल उठाया कि जज लोया को नागपुर के अच्छे अस्पताल में ले जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया। साथ ही सहयोगी जजों ने जज लोया की पत्नी को पति की मौत की जानकारी क्यों नहीं दी। इस पर पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आपात स्थिति में हर व्यक्ति अलग-अलग तरीके से सोचता है। ऐसे में यह सवाल कैसे उठाया जा सकता कि उस व्यक्ति को ऐसा ही करना चाहिए।
वहीं महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और हरीश साल्वे ने कहा कि दवे न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। अगली सुनवाई सोमवार को होगी।