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टीका ट्रायल और वैक्सीन लेने के बाद के प्रतिकूल प्रभावों को सार्वजनिक करने की सुप्रीम कोर्ट से मांग

Sat, 15 May 2021 06:52 AM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Sat, 15 May 2021 06:52 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर  कोविड -19 वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल और वैक्सीन लेने के बाद पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के डेटा में पारदर्शिता लाने की गुहार लगाई गई है।
 

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Supreme court: Demand to make public of adverse effects after vaccine trials and vaccines
vaccination - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

याचिका टीकाकरण के राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के पूर्व सदस्य डॉ जैकब पुलियेल ने दायर की है।याचिका में यह भी गुहार लगाई गई है कि सरकार को टीकाकरण की बाध्यता को असंवैधानिक घोषित करना चाहिए। 
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वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर इस याचिका में सरकार को निर्देश देने की गुहार लगाई गई है कि वह वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के अलग-अलग डेटा को सार्वजनिक करें क्योंकि वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल के तौर पर देश को लोगों को दिया जा रहा है।
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याचिका में टीकाकरण के बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभाव के आंकड़े को सार्वजनिक करने की भी गुहार लगाई गई है। याचिका में गुहार लगाई गई है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह बताए कि कोरोना वैक्सीन लेने के बाद भी कितने लोग संक्रमित हुए हैं। इनमें से कितनों को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आई और कितने लोगों की संक्रमण की वजह से मौत हुई। 
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याचिकाकर्ता ने कहा है कि टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभावों को लेकर एकत्रित किए गए आंकड़ों का टोल फ्री नंबर के माध्यम से प्रचार किया जाना चाहिए। इसी टोल फ्री नंबर पर वैक्सीन लेने के बाद आई दिक्कतों की शिकायत दर्ज की जानी चाहिए।
याचिका में  भारत में वैक्सीन को मंजूरी देने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि अथॉरिटी को वैक्सीन लेने वालों पर सावधानीपूर्वक निगरानी रखनी चाहिए। 


साथ ही वैक्सीन लेने के बाद पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को रिकॉर्ड करने की मांग की गई है। इस प्रकार के अवलोकन से दूसरे देशों में रक्त के थक्कों व स्ट्रोक को पहचानने में मदद मिली है। कई देशों ने तब तक वैक्सीन देना बंद कर दिया है जब तक वे इसका मूल्यांकन नहीं कर लेते। डेनमार्क ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन (भारत में कोविशील्ड के रूप में ब्रांडेड) के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।

 
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