उपहार कांडः 59 मौत, 20 साल और फिर 1 साल की सजा
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साल 1997 में हुए दिल्ली के उपहार कांड के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमा मालिक गोपाल अंसल को एक साल की सजा बरकरार रखी है, वहीं गोपाल के भाई सुशील अंसल को राहत भी बरकरार रखी है। मामले में गोपाल अंसल को चार हफ्ते के अंदर सरेंडर करने के लिए कहा गया है।
बता दें कि 1997 के उपहार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए सिनेमा मालिकों गोपाल अंसल को एक साल की सजा के साथ दोनों भाइयों पर 30-30 करोड़ का जुर्माना लगाया था।
उम्र को देखते हुए सुशील अंसल को जेल से राहत दे दी गई थी, हालांकि गोपाल अंसल चार महीने और सुशील पांच महीने जेल की सजा काट चुके हैं। उस समय कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा था कि जुर्माना ना देने की सूरत में दोनों को दो साल की सजा काटनी पड़ेगी।
मामले में तीन जजों की पीठ में जज कुरियन जोसेफ और रंजन गोगोई ने बहुमत से यह फैसला लिया जबकि तीसरे जज आदर्श गोयल की राय इससे जुदा थी।
बता दें कि बीस साल पुराने इस मामले में बीते 14 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिस पर आज निर्णय सुनाया गया।
पीड़ितों ने कोर्ट के निर्णय को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
वहीं उपहार पीड़ितों ने कोर्ट के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पीड़ितों की संस्था एसोसिएशन ऑफ विक्टिम ऑफ उपहार ट्रेजडी का कहना है कि कोर्ट के इस निर्णय ने उनका विश्वास न्यायपालिका से उठाने का काम किया है।
पीड़ित नीलम कृष्णमूर्ति ने कोर्ट के निर्णय को घोर दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कोर्ट की शरण में आना उनके जीवन की सबसे बड़ी गलती रही। उनका विश्वास न्यायपालिका से उठ गया है। नीलम के अनुसार कोर्ट के निर्णय से एक बार फिर साफ हो गया कि अमीर और ताकतवर लोग विशेष शक्ति का उपयोग अपने मजे के लिए कर सकते हैं।
बता दें कि 1997 में हुए उपहार कांड में 59 लोगों की मौत हो गई थी। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में उपहार सिनेमा के एक मालिक गोपाल अंसल को सजा सुनाते हुए 30 करोड़ जुर्माना भी लगाया गया था। इतना ही जुर्माना दूसरे भाई सुशील अंसल पर भी लगा था लेकिन उन्हें सजा नहीं सुनाई गई थी। इसी मामले में पीड़ितों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पुर्नविचार याचिका दायर की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्णय सुनाया।