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दागी नेताओं को अयोग्य ठहराने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

Wed, 29 Aug 2018 03:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 29 Aug 2018 03:33 AM IST
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Supreme court decision on petitions for corrupt politician secured
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह राजनीतिक दलों को गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को टिकट नहीं देने का निर्देश नहीं जारी कर सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा करना कानूनन,  अयोग्यता का नया आधार घोषित करना होगा।       

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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने हालांकि यह कहा कि हम यह देखेंगे कि उम्मीदवार अपने आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा कैसे करेंगे। चूंकि यह मांग थी कि उम्मीदवारों को लंबित मामलों केबारे में प्रमुखता से डिस्पले हो क्योंकि सभी मतदाताओं को उम्मीदवारों का हलफनामा देखने का अवसर नहीं मिल पाता।
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इसके साथ ही संविधान पीठ ने 'पीआईएल फाउंडेशन’ नामक एनजीओ, भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय समेत अन्य द्वारा दायर उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है जिनमें गुहार की थी कि अगर गंभीर आपराधिक मामलों के किसी व्यक्ति पर आरोप तय हो गए हो तो उस पर चुनाव लडने पर रोक लगाई जाए।  
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संविधान पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की उस दलील का भी हवाला दिया कि जब तक किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहरा दिया जाता तब तक वह निर्दोष होता है, ऐसे में आरोप तय होने पर किसी को चुनाव लडने से नहीं रोका जा सकता।

पीठ ने कहा, 'आपराधिक मामले में आरोप तय होने केबाद अगर उस व्यक्ति को किसी पंजीकृत राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लडने पर रोक लगाई जाएगी तो यह एक मायने में पिछले दरवाजे से आयोग्यता का नया आधार बनाना माना जाएगा।’ 

जब जज या अफसर नहीं बन सकते तो नेता कैसे : याचिकाकर्ता
एक याचिककर्ता की ओर पेश वरिष्ठ वकील कृष्णन वेणुगोपाल ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति पर पर गंभीर आपराधिक मामले में शामिल होने का आरोप लगता तो वह जज या नौकरशाह नहीं बन सकता तो वह विधायक या सांसद कैसे बन सकता है। उन्होंने कहा कि क्या हम विधायक या सासंदों में ईमानदारी का न्यूनतम मानक होने की उम्मीद नहीं रख सकते।

उन्होंने कहा कि भारत में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों में तीस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा कि चुनाव लड़ना वैधानिक अधिकार है, लिहाजा इसमें कटौती की जा सकती है और उसे नियमित किया जा सकता है।


वहीं चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा का कहना था कि राजनीतिक दलों का यह दायित्व होना चाहिए कि वह गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को टिकट न दें। सभी पक्षों को सुनने के बाद पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। 

 

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