फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court decision on get salary and pension

वेतन के अनुपात में पेंशन देने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की फिलहाल ‘रोक’

Fri, 26 Feb 2021 05:28 AM IST
Jeet Kumar राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 26 Feb 2021 05:28 AM IST
विज्ञापन
Supreme Court decision on get salary and pension
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

वेतनभोगियों को भविष्य निधि पेंशन कितनी मिलेगी, यह जानने के लिए उन्हें अभी इंतजार करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को वेतन के अनुपात में भविष्य निधि पेंशन देने के फैसले पर फिलहाल परोक्ष रूप से ‘रोक’ लगा दी है।

विज्ञापन


इससे पहले गत 31 जनवरी को कोर्ट ने वर्ष 2019 के अपने उस फैसले को वापस लेते हुए पुनर्विचार करने का फैसला लिया था जिसके तहत अधिकतम पेंशन योग्य वेतन प्रतिमाह 15 हजार रुपये की सीमा को खत्म कर अधिक पेंशन देने का रास्ता खुला था। वर्ष 2018 के केरल हाईकोर्ट के फैसले पर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाई थी।
विज्ञापन


जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने बृहस्पतिवार को केरल, दिल्ली और राजस्थान हाईकोर्ट में केंद्र सरकार और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के खिलाफ चल रही अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगा दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे साफ है कि वेतन के अनुपात में पेंशन देने के आदेश का अनुपालन न करने पर फिलहाल केंद्र सरकार और ईपीएफओ को दंडित नहीं किया जाएगा। इन सभी हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिकाओं में कहा गया है कि एक अप्रैल, 2019 को सुप्रीम कोर्ट से मुहर लगने के बाद सरकार और ईपीएफओ ने वेतन के अनुरूप पेंशन की रूपरेखा तैयार नहीं की है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और ईपीएफओ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम ने पीठ से सितंबर 2018 के केरल हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की जिसमें वेतन के अनुसार पेंशन देने के लिए कहा गया था लेकिन पीठ ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया।

वास्तव में बृहस्पतिवार को जस्टिस ललित दो सदस्यीय पीठ में बैठे थे, जबकि इस मसले पर विचार तीन सदस्यीय पीठ कर रही है। श्रम मंत्रालय व ईपीएफओ द्वारा केरल हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करने का कारण है कि इससे पेंशन 50 गुना तक बढ़ सकती है।


पीठ ने इस मामले पर 23 मार्च से नियमित सुनवाई करने का निर्णय करते हुए सरकार और ईपीएफओ की याचिकाओं पर सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हम लोगों को अधिक इंतजार नहीं करवा सकते जो यह जानने के लिए बेकरार हैं कि पीएफ पेंशन का स्वरूप क्या होगा व भविष्य में उनके लिए क्या है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed