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SC: पीएमएलए की अनुसूची में शामिल होने पर ही 120-बी के तहत आपराधिक साजिश का मामला बनेगा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Thu, 30 Nov 2023 07:05 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 30 Nov 2023 07:05 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा, धारा 120-बी के तहत दंडनीय अपराध केवल तभी एक अनुसूचित अपराध बनेगा, जब कथित साजिश, पीएमएलए अनुसूची में विशेष रूप से शामिल अपराध करने की हो। उस आधार पर, हम ईडी की कार्यवाही को रद्द करते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के तहत दंडनीय आपराधिक साजिश के अपराध को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत सिर्फ तभी एक अनुसूचित अपराध माना जाएगा, जब कथित साजिश पीएमएलए की अनुसूची में अपराध के रूप में शामिल हो।
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जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस पंकज मित्थल की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू के उस तर्क को खारिज कर दिया कि पीएमएलए अधिनियम की धारा 2 (वाई) के तहत धारा 120-बी अनुसूचित अपराध से संबंधित है और इसके तहत ईडी अधिकारियों के पास अपराध की जांच करने की शक्ति है।
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कोर्ट ने कहा, धारा 120-बी के तहत दंडनीय अपराध केवल तभी एक अनुसूचित अपराध बनेगा, जब कथित साजिश, पीएमएलए अनुसूची में विशेष रूप से शामिल अपराध करने की हो। उस आधार पर, हम ईडी की कार्यवाही को रद्द करते हैं।
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कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुनाया फैसला
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति पंकज मित्थल की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ दायर अपील पर यह फैसला सुनाया, जिसने पीएमएलए के तहत याचिकाकर्ता के खिलाफ धन शोधन के अपराध के लिए बंगलूरू में विशेष न्यायाधीश के सामने लंबित मामले में कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 143, 406, 407, 408, 409, 149 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
पीएमएलए को किसी मामले में सिर्फ तभी लागू किया जा सकता है यदि अपराध इस कानून के तहत सूचीबद्ध हो। पीठ ने कहा, वर्तमान मामले में अपराध पीएमएलए के तहत अनुसूचित नहीं है, इसके बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईपीसी की धारा 120बी (जो अनुसूचित अपराध है) लगा कर इसमें पीएमएलए लागू कर दिया।
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति पंकज मित्थल की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ दायर अपील पर यह फैसला सुनाया, जिसने पीएमएलए के तहत याचिकाकर्ता के खिलाफ धन शोधन के अपराध के लिए बंगलूरू में विशेष न्यायाधीश के सामने लंबित मामले में कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया था।
पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 143, 406, 407, 408, 409, 149 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पीएमएलए को किसी मामले में सिर्फ तभी लागू किया जा सकता है यदि अपराध इस कानून के तहत सूचीबद्ध हो। पीठ ने कहा, वर्तमान मामले में अपराध पीएमएलए के तहत अनुसूचित नहीं है, इसके बावजूद ईडी ने आईपीसी की धारा 120बी (जो अनुसूचित अपराध है) लगा कर इसमें पीएमएलए लागू कर दिया।
ईडी की ओर से दर्ज मामले के बाद खड़ा हुआ विवाद
वर्तमान मामले में, एलायंस विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के खिलाफ 7 मार्च, 2022 को ईडी की ओर से दर्ज मामले ने विवाद खड़ा कर दिया है। ईडी ने याचिकाकर्ता पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 44 और 45 के तहत आरोप लगाए हैं, जिसमें धारा 3 के साथ धारा 8 (5) और 70 के तहत परिभाषित अपराधों का हवाला दिया गया है, जो पीएमएलए की धारा 4 के तहत दंडनीय हैं।
आरोप है कि 2014 से 2016 तक एलायंस यूनिवर्सिटी के वीसी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, मधुकर अंगुर (आरोपी नंबर 1) से परिचित अपीलकर्ता ने बिना किसी विचार के एक दिखावटी और नाममात्र बिक्री विलेख को अंजाम देने की साजिश रची, जिसमें एलायंस यूनिवर्सिटी से संबंधित संपत्तियां शामिल थीं। यह भी दावा किया गया कि उसने आरोपी नंबर 1 को अपने बैंक खातों का उपयोग विश्वविद्यालय से निकाले गए धन को छिपाने के लिए करने में मदद की।