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Supreme Court: भारत में कैदियों की अप्राकृतिक मृत्यु का मुख्य कारण आत्महत्या, SC समिति ने शीर्ष अदालत को बताया

Thu, 31 Aug 2023 02:01 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 31 Aug 2023 02:01 PM IST
सार

रिपोर्ट में कहा गया है, समिति ने भारत की जेलों में मौतों (प्राकृतिक और अप्राकृतिक) से संबंधित पीएसआई डाटा का विश्लेषण किया और पाया कि हिरासत में होने वाली मौतों की संख्या में 2019 के बाद से लगातार वृद्धि देखी गई है और 2021 में अब तक की सबसे अधिक मौतें आत्महत्या (80 प्रतिशत) की दर्ज की गई हैं, जो अप्राकृतिक मौतों का प्रमुख कारण है।

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Supreme Court committee tells apex court, Suicide major cause of unnatural deaths among prisoners in India
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की जेल सुधार समिति ने आत्महत्या प्रतिरोधी बैरक बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए शीर्ष अदालत को बताया कि 2017 और 2021 के बीच देशभर की जेलों में हुई 817 अप्राकृतिक मौतों का एक प्रमुख कारण आत्महत्या है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अमिताव राय की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त समिति ने कहा है कि 817 अप्राकृतिक मौतों में से 660 आत्महत्याएं थीं और इस अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 101 आत्महत्याएं दर्ज की गईं।

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समिति ने शीर्ष अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट के अंतिम सारांश में कहा है, जेल के बुनियादी ढांचे के मौजूदा डिजाइन के भीतर संभावित हैंगिंग और एंकरिंग पॉइंट की पहचान करने और आत्महत्या प्रतिरोधी सेल या बैरक के निर्माण करने की आवश्यकता है। 27 दिसंबर, 2022 की रिपोर्ट के अंतिम सारांश में नौ अध्याय हैं, जिनमें जेलों में अप्राकृतिक मौतें, मौत की सजा पाए दोषियों और भारतीय जेलों में हिंसा शामिल हैं।
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सितंबर, 2018 में शीर्ष अदालत ने जेल सुधारों से जुड़े मुद्दों को देखने और जेलों में भीड़भाड़ सहित कई पहलुओं पर सिफारिशें करने के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। "जेलों में अप्राकृतिक मौतें" शीर्षक वाले खंड में समिति ने कहा है कि हिरासत में यातना या हिरासत में मौत नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है और यह मानवीय गरिमा का अपमान है।
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इसमें कहा गया है कि रिपोर्ट 2017 से 2021 तक प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया (पीएसआई) रिपोर्ट में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है, जिसे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा प्रकाशित किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, समिति ने भारत की जेलों में मौतों (प्राकृतिक और अप्राकृतिक) से संबंधित पीएसआई डाटा का विश्लेषण किया और पाया कि हिरासत में होने वाली मौतों की संख्या में 2019 के बाद से लगातार वृद्धि देखी गई है और 2021 में अब तक की सबसे अधिक मौतें आत्महत्या (80 प्रतिशत) की दर्ज की गई हैं, जो अप्राकृतिक मौतों का प्रमुख कारण है। इसमें कहा गया है कि 2017 से 2021 तक पांच वर्षों में वृद्धावस्था के कारण 462 मौतें हुईं और बीमारी के कारण 7,736 कैदियों की मौत हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है, 2017-2021 के बीच भारत की जेलों में हुई कुल 817 अप्राकृतिक मौतों में से पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत भर की जेलों में 660 आत्महत्याएं और 41 हत्याएं हुईं। समिति ने कहा कि इस अवधि के दौरान 46 मौतें आकस्मिक मौतों से संबंधित थीं, जबकि सात कैदियों की मौत क्रमशः बाहरी तत्वों के हमले और जेल कर्मियों की लापरवाही या ज्यादती के कारण हुई।

इसमें कहा गया है, उत्तर प्रदेश में पिछले पांच वर्षों यानी वर्ष 2017 से 2021 के दौरान देश में सबसे अधिक आत्महत्याएं (101) दर्ज की गई हैं, इसके बाद पंजाब और पश्चिम बंगाल राज्य हैं जहां क्रमशः 63 और 60 कैदियों ने आत्महत्या की। केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में पिछले पांच वर्षों के दौरान सबसे अधिक 40 आत्महत्याएं दर्ज की गईं।समिति ने सिफारिश की है कि जहां तक संभव हो अदालतों में वरिष्ठ नागरिकों और बीमार कैदियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से की जाए।

इसमें कहा गया है, आत्महत्या कैदियों के बीच अप्राकृतिक मौतों का एक प्रमुख कारण है। जेल कर्मचारियों को चेतावनी के संकेतों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए और जेलों में जीवन की सुरक्षा के लिए उचित तंत्र तैयार करना चाहिए। समिति ने कहा कि जेल कर्मचारियों को नियमित रूप से अवसाद और असामान्य व्यवहार के लक्षणों को पहचानने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए, जिसमें आत्मघाती इरादा भी शामिल हो सकता है और कैदियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार अनिवार्य रूप से मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की जानी चाहिए।

इसमें कहा गया है कि आत्महत्या के इलाज का एक सुसंगत और अच्छी तरह से शोधित मॉडल विकसित किया जाना चाहिए और इसे देशभर की जेलों में लागू किया जाना चाहिए। साथ ही जेल प्रशासन को कैदियों के बीच हिंसा को रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

समिति ने कहा, जेलों में हिंसा को कम करने के लिए यह सिफारिश की गई है कि पहली बार अपराध करने वाले और बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों के बीच जेलों, अस्पतालों और अदालतों और अन्य स्थानों पर उनके परिवहन के दौरान अलगाव होना चाहिए। इसमें कहा गया है, जेल प्रशासन को राष्ट्रीय और राज्य स्वास्थ्य बीमा योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत योजना, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना और इसी तरह की राज्य स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को जेलों में व्यापक रूप से लागू करने का प्रयास करना चाहिए।


कई सिफारिशों में रिपोर्ट ने कैदियों के लिए अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता का भी सुझाव दिया। शीर्ष अदालत पूरे भारत में 1,382 जेलों में व्याप्त स्थितियों से संबंधित मामले पर विचार कर रही है। इस मामले की सुनवाई 26 सितंबर को होनी है।

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