किसानों पर सितम और अमीर अरबों हड़प जाते हैं: सुप्रीम कोर्ट
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सरकारी बैंकों के फंसे हुए कर्ज(बैड लोन) की रकम को दंग करने वाला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ओर जहां कृषि ऋण को चुकता न कर पाने पर किसानों को कुछ हजार रुपये में जमीन बेचने के लिए बाध्य होना पड़ता है वहीं हजारों करोड़ रुपये ऋण का चुकता नहीं करने वाले की कोई खोज खबर लेने वाला नहीं।
वहीं रिजर्ब बैंक ऑफ इंडिया ने शीर्ष अदालत को सीलबंद लिफाफे में 500 करोड़ रुपये से अधिक का बैंक ऋण को चुकता न करने वालों की सूची शीर्ष अदालत को सौंप दी, लेकिन आरबीआई ने अदालत से सूची को सार्वजनिक न करने की गुहार की। आरबीआई ने यह भी कहा कि इस मामले में शामिल रकम का खुलासा किया गया तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ है कि बैड लोन की रकम बहुत बड़ी है। पीठ ने आरबीआई से कहा कि हम यह जानना चाहते हैं कि इस रकम को वापस लेने के लिए क्या कदम उठाए गए।
आरबीआई को यह बताने के लिए कहा गया है कि गत पांच वर्षों में सरकारी बैंकों ने लोन की कितनी रकम को माफी दी है। पीठ ने आरबीआई को पाठ पढ़ाते हुए कहा कि आपका काम इन चीजों पर नजर रखने का है।
पीठ ने कहा क्या यह आरबीआई का काम नहीं है कि वह इस पर नजर रखे कि सरकारी बैंक किस तरह से लोन देते हैं। सरकारी बैंकों से उम्मीद की जाती है कि वह सही तरीके से लोन वितरित करें और अगर बैंक नियमों को धता बताते हुए या बिना उचित सिक्योरिटी केलोन वितरित करता हो तो क्या आरबीआई को उनकेखिलाफ कार्रवाई नहीं करनी चाहिए? आरबीआई वॉचडॉग की तरह है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा,भारतीय अर्थव्यवस्था हो सकती प्रभावित
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि वह बैड लोन और लोन माफी के तमाम पहलुओं पर गौर करेगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे कई लोग जो हजारों करोड़ रुपये लोन लेते हैं और भाग जाते हैं और बैंक उनकेलोन को माफ कर देता है। वहीं किसानों द्वारा चंद हजार रुपये लोन चुकता न करने पर उन्हें उनकी जमीनों को बेचने के लिए बाध्य किया जाता है।
शीर्ष अदालत ने इस मामले में वित्त मंत्रालय और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है। पीठ ने कहा कि रकम बहुत बड़ी है, लिहाजा हम इस मामले का दायरा बढ़ाना चाहते हैं। हम यह देखेंगे कि इस मामले में क्या करने की दरकार है।
आरबीआई द्वारा डिफॉल्टरों की सूची सार्वजनिक नहीं करने की गुहार पर शीर्ष अदालत ने कहा कि फिलहाल भले ही नाम को गोपनीय रखा जाए लेकिन इस मामले में कितनी रकम शामिल है, इसका खुलासा तो किया जा सकता है।
इस पर आरबीआई की ओर से पेश वकील ने कहा कि रकम केखुलासे से भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि नामों का खुलासा न करना गत वर्ष दिसंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट के आदेश केखिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार को मदद करने का आग्रह करते हुए सुनवाई 26 अप्रैल तक के लिए टाल दी।