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Supreme Court: ‘बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते’, NCERT की किताब में न्यायपालिका पर सामग्री से सीजेआई नाराज

Wed, 25 Feb 2026 10:58 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: हिमांशु चंदेल Updated Wed, 25 Feb 2026 10:58 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं की किताब में न्यायपालिका पर जोड़ी गई सामग्री पर कड़ा रुख अपनाया है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वरिष्ठ वकीलों ने इस मुद्दे को उठाया था। अदालत ने संकेत दिया है कि स्वतः संज्ञान लेकर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जानिए क्या है पूरा मामला...
 

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Supreme Court Class 8 NCERT book contain material on corruption in judiciary CJI Surya Kant Bench Hearing news
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी सामग्री पर गंभीर नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने साफ कहा कि अदालत किसी को भी न्यायपालिका की छवि खराब करने की इजाजत नहीं दे सकती। उन्होंने संकेत दिया कि अदालत इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकती है। यह मामला देश की न्यायिक व्यवस्था की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है।
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मामला तब उठा जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस मुद्दे को रखा। उन्होंने कहा कि स्कूल के बच्चों को इस तरह की सामग्री पढ़ाया जाना चिंताजनक है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पहले से इस विषय की जानकारी है और कई कॉल तथा संदेश मिले हैं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान को बदनाम करने की सुनियोजित कोशिश लगती है।
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अदालत ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह न्यायपालिका को बदनाम नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और जरूरत पड़ी तो अदालत स्वतः संज्ञान लेगी। अदालत ने संकेत दिया कि इस विषय पर उचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि उन्होंने विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन कहा कि मामला गंभीर है और हल्के में नहीं लिया जाएगा।

विवाद किस सामग्री को लेकर है?
विवाद एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में जोड़े गए एक खंड को लेकर है। इस खंड में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित चर्चा शामिल की गई है। इसी विषयवस्तु को लेकर सवाल उठे हैं कि क्या इसे इस तरह प्रस्तुत करना उचित है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया है और इसे संस्थागत गरिमा से जुड़ा विषय माना है।


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वरिष्ठ वकीलों की चिंता क्या थी?
कपिल सिब्बल ने अदालत से आग्रह किया कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चे जो पढ़ते हैं, वही उनके मन में बैठता है। यदि न्यायपालिका को लेकर नकारात्मक संदेश जाएगा तो इससे संस्थान की विश्वसनीयता प्रभावित होगी। अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इस पर चिंता जताई और कहा कि ऐसी सामग्री संतुलित और जिम्मेदार तरीके से होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है। यह मामला शिक्षा सामग्री और संस्थागत सम्मान के बीच संतुलन का है। अब नजर इस बात पर है कि अदालत आगे क्या दिशा-निर्देश देती है और क्या एनसीईआरटी को कोई संशोधन करना पड़ेगा।

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