फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court: Check bounce issued as security is also an offense under NI Act, action can be taken

सुप्रीम कोर्ट: सिक्योरिटी के तौर पर जारी चेक बाउंस होना भी एनआई एक्ट के तहत अपराध, हो सकती है कार्रवाई

Fri, 29 Oct 2021 10:33 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 29 Oct 2021 10:33 PM IST
सार

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा, इस तरह का विवाद केवल उस स्थिति में उत्पन्न होता है जहां तय समय के भीतर बकाए की वसूली न हो पाई हो और जमानत के रूप में जारी किया गया चेक न भुनाया जा सका हो। 

विज्ञापन
Supreme Court: Check bounce issued as security is also an offense under NI Act, action can be taken
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिक्योरिटी के तौर पर जारी चेक के बाउंस होने पर भी एनआई एक्ट की धारा-138 के तहत अपराध हो सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा सख्त नियम नहीं हो सकता है कि सिक्योरिटी के तौर पर जारी किया गया चेक कभी भी नहीं भुनाया जाएगा।

विज्ञापन


जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा, इस तरह का विवाद केवल उस स्थिति में उत्पन्न होता है जहां तय समय के भीतर बकाए की वसूली न हो पाई हो और जमानत के रूप में जारी किया गया चेक न भुनाया जा सका हो। 
विज्ञापन


मौजूदा मामले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि सिक्योरिटी के रूप में जारी किया गया चेक बाउंस होना अपराध नहीं हो सकता। इस पर पीठ ने कहा, इस न्यायालय द्वारा उक्त मामले में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है कि सिक्योरिटी के रूप में जारी किया गया चेक सभी परिस्थितियों में वसूली के लिए प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आरटीपीसीआर निटेगिव की शर्त के खिलाफ याचिका खारिज
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें कर्नाटक सरकार द्वारा केरल से आने वाले लोगों के लिए निगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट अनिवार्य करने के निर्णय को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि कर्नाटक सरकार का यह निर्णय मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं है। 


जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा, कोविड-19 अभी खत्म नहीं हुआ है और इस तरह की शर्तें लगाने को कहीं से भी अतार्किक नहीं कहा जा सकता। क्योंकि ये व्यापक जन हित में लिया गया फैसला है इसलिए इसके खिलाफ किसी मांग पर सुनवाई नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस शर्त के अलावा केरल के लोगों को कर्नाटक में आने पर कोई रोक नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed