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हत्या के दोषी ने सुनाई कविता,सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा उम्रकैद में बदली

Sun, 03 Mar 2019 08:59 PM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Sun, 03 Mar 2019 08:59 PM IST
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Supreme Court change death sentence to life imprisonment After Hearing the Guilty poem
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक बच्चे की हत्या के जुर्म में मौत की सजा पाए दोषी की सजा उम्रकैद में बदल दी। शीर्ष अदालत का कहना है कि वह खुद को सुधारना चाहता था और जेल में लिखी उसकी कविता से पता चलता है कि उसे अपनी गलती का एहसास है।

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न्यायमूर्ति ए के सीकरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि डी सुरेश बोरकर ने जब जुर्म किया तब वह 22 साल का था। जेल में रहते हुए उसने ‘मुख्यधारा में आने की कोशिश’ की और एक ‘सभ्य इंसान’ बना। पीठ ने कहा कि बोरकर पिछले 18 सालों से जेल में बंद है और उसका आचरण दिखाता है कि वह सुधरना चाहता है और उसका पुनर्वास किया जाना चाहिए।
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पीठ ने कहा, ‘इस मामले में तथ्यों और हालात को देखते हुए हमें यह लगता है कि फांसी की सजा उचित नहीं है। सजा को उम्रकैद में तब्दील करने के दौरान हालात के उतार-चढ़ाव में संतुलन बिठाते हुए हमें लगा कि विषम परिस्थितियां दोषी बोरकर के पक्ष में हैं।’ 
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पीठ ने कहा, ‘जेल में कविता लिखने से लेकर युवावस्था में ही अपनी गलती का एहसास होने तक विषम परिस्थितियां दोषी के पक्ष में थीं और वह सुधरना चाहता है।’ बोरकर ने 2006 के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। दरअसल हाईकोर्ट ने एक नाबालिग की हत्या के जुर्म पुणे के ट्रायल कोर्ट की फांसी की सजा को बरकरार रखा था।

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