फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court canceled Bail Student Leader accused of Rape Posted on Social Media after Release Bhaiya is back

बेशर्म आचरण: ‘भैया इज बैक’ ने वापस भिजवाया जेल, दुष्कर्म के आरोपी छात्र नेता ने रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर किया था पोस्ट

Fri, 06 May 2022 05:02 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 06 May 2022 05:02 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने आरोपी शुभांग गोटिया को प्राथमिकी दर्ज करने में देरी के आधार पर राहत दी थी। जबकि, उसके आपराधिक इतिहास की अनदेखी की गई थी।

विज्ञापन
Supreme Court canceled Bail Student Leader accused of Rape Posted on Social Media after Release Bhaiya is back
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दुष्कर्म के मामले में रिहा किए गए छात्र नेता को सोशल मीडिया पर नामी लोगों के चेहरे के साथ ‘भैया इज बैक’ वाली पोस्ट करना महंगा पड़ा है। नाराज सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को छात्र नेता की जमानत रद्द कर दी। उस पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप है।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने आरोपी शुभांग गोटिया को प्राथमिकी दर्ज करने में देरी के आधार पर राहत दी थी। जबकि, उसके आपराधिक इतिहास की अनदेखी की गई थी।
विज्ञापन


जस्टिस हिमा कोहली ने पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा, इस गंभीर अपराध में दो महीने से कम समय में हिरासत से रिहा होने के बाद आरोपी और उसके समर्थकों के जश्न गुणगान करने वाले हैं। जबकि इस गंभीर अपराध के लिए कम से कम दस साल की सजा होती है। पीठ ने यह भी कहा कि इस बेशर्म आचरण ने शिकायतकर्ता के मन में एक वास्तविक भय पैदा किया कि उसे एक निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी। आरोपी के गवाहों को प्रभावित करने की भी आशंका है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


तस्वीरें आरोपी के परिवार की शक्ति उजागर कर रहीं...शिकायतकर्ता पर हानिकारक पड़ेगा प्रभाव
पीठ ने कहा, सोशल मीडिया पर तस्वीरों के साथ टैग कैप्शन समाज में आरोपी व उसके परिवार की बेहतर स्थिति और शक्ति को उजागर करते हैं। शिकायतकर्ता पर इसके हानिकारक प्रभाव को भी जाहिर करते हैं। लिहाजा पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी को एक सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।


पीड़िता ने हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए कहा था, रिहाई के बाद उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया में दिखाई दीं, जिसमें उसके स्नैपशॉट प्रमुख रूप से पोस्टर और होर्डिंग पर समाज के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के चेहरे के साथ सबसे आगे दिखाए गए और ‘भैया इज बैक’, ‘बैक टू भैया’ जैसे कैप्शन के साथ उसका स्वागत किया गया। वहीं आरोपी ने दावा किया कि वह छात्र नेता है और पोस्टरों से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि कोर्ट ने कहा, मुकुट और दिल के इमोजी इस तर्क को झुठलाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed