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Supreme Court: 'गैरेज से चलते लॉ कॉलेजों को मान्यता चिंताजनक'; अदालत 50 वर्षीय CA के केस में BCI से क्या बोली?
Tue, 21 Jul 2026 03:12 AM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 21 Jul 2026 03:12 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मुकदमे की सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा, गैरेज से चल रहे लॉ कॉलेजों को मान्यता देना चिंता का विषय है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मुकदमे का जिक्र भी आया। बीसीआई की कार्यशाली को लेकर कोर्ट ने क्या कुछ कहा? जानिए इस खबर में
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की ओर से गैरेज जैसी जगहों से चल रहे कुछ लॉ कॉलेजों को मान्यता देने पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने एक आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर एक लॉ स्नातक को वकील के रूप में पंजीकृत (एनरोल) न करने के काउंसिल के फैसले की भी कड़ी आलोचना की।
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तीन जजों की पीठ ने BCI पर कड़ी टिप्पणी में क्या कहा?
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस आर महादेवन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान जब बीसीआई के वकील ने इसे बड़ी चिंता का विषय बताया, तो जस्टिस मेहता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, वास्तविक बड़ी चिंता यह है कि बीसीआई उन कॉलेजों को मान्यता दे रही है जो गैरेज में चल रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि काउंसिल पूरे देश में हर तरफ दोषियों को पंजीकृत कर रही है।
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क्या है मामला, किसने दायर की याचिका?
यह याचिका 50 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट केआर सुदर्शन ने दायर की है, जिन्होंने बाद में कानून (लॉ) की डिग्री हासिल की। तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल ने उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित होने के कारण वकील के रूप में उनका पंजीकरण करने से इन्कार कर दिया था। सुदर्शन पर आरोप है कि उन्होंने एक ऐसी कंपनी को सलाह दी थी जो वित्तीय अनियमितताओं में शामिल थी।
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मुकदमे के दौरान राजीव गांधी हत्याकांड का जिक्र क्यों?
याचिकाकर्ता के वकील निखिल गोयल ने कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग करते हुए तर्क दिया कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 24ए के तहत सिर्फ मामला लंबित होने के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में 31 साल की सजा काट चुके एक दोषी को भी इस साल अप्रैल में वकील के रूप में पंजीकृत किया गया था।
बीसीआई के रुख पर कितने सवाल?
गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की पीठ ने बीसीआई के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि काउंसिल का यह आदेश पूरी तरह से कानून के खिलाफ है। फिलहाल मद्रास हाईकोर्ट ने इस कानूनी मुद्दे को पांच जजों की बड़ी बेंच के पास भेज दिया है।