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तृणमूल कार्यकर्ताओं से झड़प मामले में भाजपा नेता के खिलाफ दर्ज दो एफआईआर पर रोक
Wed, 13 Jan 2021 10:00 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 13 Jan 2021 10:00 PM IST
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
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उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकताओं और भाजपा नेता कबीर शंकर बोस के सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई झड़प की घटना में बोस के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकियों की कार्यवाही पर बुधवार को रोक लगा दी। अदालत ने यह फैसला सीआईएसएफ की विशेष घटना रिपोर्ट के अवलोकन के बाद किया।
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न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऋषिकेष राय की पीठ ने इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता कबीर बोस की याचिका पर राज्य सरकार और राज्य पुलिस को नोटिस जारी किए। बोस ने इस घटना की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है।
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वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान बोस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और अनुपमलाल दास तथा अधिवक्ता समीर कुमार ने कहा कि शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार सीआईएसएफ ने सीलबंद लिफाफे में पिछले साल छह दिसंबर की घटना के बारे में अपनी रिपोर्ट दाखिल की है।
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केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने भी इस बात की पुष्टि की सीआईएसएफ की रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। न्यायालय ने इस मामले में पांच जनवरी को हुई इस कथित झड़प के संबंध में सीआईएसएफ द्वारा दायर विशेष घटना रिपोर्ट पेश करने का केंद्र सरकार को निर्देश दिया था।
साथ ही, न्यायालय ने घटना वाले दिन भाजपा नेता से संबंधित मूवमेंट लॉग बुक सीलबंद लिफाफे में पेश करने का भी निर्देश दिया था। विशेष घटना रिपोर्ट वह औपचारिक रिपोर्ट है जो क्षेत्रीय केंद्र में कार्यरत व्यक्ति के किसी अपराध या घायल होने जैसी किसी घटना में संलिप्त होने के बारे में दाखिल की जाती है।
बोस ने अपनी याचिका में इस घटना की जांच बंगाल पुलिस से इतर सीबीआई, विशेष जांच दल या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने और छह दिसंबर को कथित झड़प से संबंधित घटना के सिलसिले में बंगाल पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में जांच और आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।
भाजपा नेता कबीर बोस ने अपनी याचिका में दावा किया है कि पश्चिम बंगाल के सेरामपुर में वह और उनके साथ चल रही सीआईएसएफ की टुकड़ी पर उनके घर के बाहर ही रात में करीब आठ बजे संतोष कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह के नेतृत्व में जबर्दस्त पथराव किया गया था।
उन्होंने कहा कि यह हमला होते ही सीआईएसएफ याचिकाकर्ता को तुरंत ही सुरक्षित स्थान पर ले गई थी। इसके बाद सवेरे दो बजे तक इस क्षेत्र के सांसद कल्याण बनर्जी के नेतृत्व में राज्य पुलिस के सक्रिय समर्थन से तृणमूल कांग्रेस के 200 से ज्यादा गुंडों ने पूरी इमारत की घेराबंदी कर रखी थी।
बोस ने कहा है कि सात दिसंबर को पश्चिम बंगाल पुलिस ने पूरी इमारत की घेराबंदी कर ली थी और उन्हें कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए इमारत से बाहर निकलने से रोका। उनके अनुसार थाने में पुलिस अधिकारी बार बार कह रहे थे कि कल्याण बनर्जी याचिकाकर्ता की तुरंत गिरफ्तारी के लिए जबर्दस्त दबाव डाल रहे थे।
उनका कहना है कि इसीलिए याचिकाकर्ता को थाने में ही गिरफ्तार कर लिया गया और संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हुये उसे जानबूझ कर कोविड पृथकवास वार्ड में दूसरे कोविड मरीजों के साथ करीब चार घंटे तक रखा गया।
न्यायालय ने पिछले साल 18 दिसंबर को भारतीय जनता पार्टी के पांच नेताओं को उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल में दर्ज आपराधिक मामलों में अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था। इसके साथ ही अदालत ने राज्य की पुलिस को निर्देश दिया था कि इन नेताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।
न्यायालय से अंतरिम संरक्षण प्राप्त करने वाले नेताओं में भाजपा के इन नेताओं में मुकुल रॉय के अलावा दो सांसद कैलाश विजयवर्गीय और अर्जुन सिंह भी शामिल हैं। इनके अलावा, भाजपा के दो अन्य नेताओं-सौरव सिंह और पवन कुमार को भी न्यायालय ने इसी तरह का अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था।
इन सभी नेताओं ने अलग-अलग दायर याचिकाओं में आरोप लगाया है कि विधानसभा के आसन्न चुनावों से संबंधित राजनीतिक गतिविधियों से उन्हें दूर रखने के लिए उन पर आपराधिक मामले थोपे जा रहे हैं।