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Godhra Train Burning Case: गोधरा कांड में उम्रकैद की सजा काट रहे आठ दोषियों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
Fri, 21 Apr 2023 02:16 PM IST
कुमार विवेक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Fri, 21 Apr 2023 02:16 PM IST
सार
Godhra Train Burning Case: 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आगजनी के चलते 59 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य में सांप्रदायिक हिंसा भड़क हुई थी।
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godhra case
- फोटो : PTI
विस्तार
गुजरात के गोधरा में 2002 में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आठ दोषियों को जमानत दे दी। सभी दोषी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। सभी दोषी 17 से 20 साल की सजा काट चुके हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कुछ दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इन दोषियों में वह आरोपी शामिल थे, जिन्हें निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने इसे उम्रकैद में बदल दिया था।
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निचली अदालत ने 11 दोषियों को मौत की सजा, जबकि 20 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में मौत की सजा को कम करते हुए 31 की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। इनमें से कुछ ने अपनी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपनी अपीलों के निस्तारण तक जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आगजनी के चलते 59 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य में सांप्रदायिक हिंसा भड़क हुई थी।
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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कही थी यह बात
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा था कि मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील के अलावा दोषियों की जमानत याचिकाओं से कुशलतापूर्वक निपटने के लिए भेद करने की आवश्यकता थी। अभी वह उन लोगों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर रहा है जिन्हें निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी।
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गुजरात सरकार ने दिया था ये तर्क
गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई की शुरुआत में कहा कि हम उन दोषियों को मौत की सजा देने के लिए गंभीरता से दबाव डालेंगे, जिनकी मौत की सजा को हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया। यह दुर्लभ से दुर्लभ मामला है जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 59 लोग जिंदा जल गए। हर जगह यही कहा गया कि बोगी (कोच) पर बाहर से ताला लगा हुआ था। यह केवल पथराव का सामान्य मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को कहा था कि वह मामले की सुनवाई की अगली तारीख पर दोषियों की जमानत याचिकाओं का निस्तारण करेगी। 20 फरवरी को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह उन 11 दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग करेगी जिनकी सजा को गुजरात हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया था।