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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा: चुनावी बॉन्ड से मिले चंदे का गैरकानूनी इस्तेमाल रोकने के लिए क्या तंत्र है

Thu, 25 Mar 2021 03:26 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 25 Mar 2021 03:26 AM IST
सार

  • चुनावी बॉन्ड पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित।
  • चुनावी बॉन्ड केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से ही खरीदे जा सकते हैं।
     

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Supreme Court asks to center mechanism to stop use of donations received from election bonds in illegal activities
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या उसके पास ऐसा कोई तंत्र है, जिससे चुनावी बॉन्ड से मिले चंदे का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में न किया जा सके। अगर कोई राजनीतिक दल चंदे का इस्तेमाल हिंसक प्रदर्शन या अन्य गैरकानूनी उद्देश्य के लिए करता है, तो उससे कैसे निपटना जा सकता है। फिलहाल पीठ ने चुनावी बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

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चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने बुधवार को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा, ऐसे राजनीतिक दल भी हैं, जिनका एजेंडा हिंसा है। क्या ऐसे दल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंडिंग नहीं करते होंगे। अगर राजनीतिक दल फंड इकट्ठा करें और इसका इस्तेमाल किसी प्रदर्शन में करें और प्रदर्शन हिंसक हो जाए। फंड के इस तरह के इस्तेमाल पर सरकार का नियंत्रण क्या है?
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जवाब में वेणुगोपाल ने कहा, जनप्रतिनिधि कानून के तहत पंजीकृत दल, जिन्हें कम से कम एक फीसदी वोट मिला हो, वहीं दान के रूप में बॉन्ड को भुना सकती हैं। 15 दिनों में बॉन्ड पेपर में तब्दील हो जाता है और राजनीतिक दल एसबीआई से बॉन्ड को भुना सकते हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि अगर 100 करोड़ रुपेय का बॉन्ड खरीदा जाता है तो क्या गारंटी है कि इसका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में नहीं होगा। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, चुनावी बॉन्ड केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से ही खरीदे जा सकते हैं।
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शीर्ष अदालत एडीआर द्वारा दायर उस आवेदन पर सुनवाई कर रही थी जिसमें पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी बॉन्ड की बिक्री शुरू करने के निर्णय पर रोक लगाने की मांग की गई है। अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि एक से 10 अप्रैल के बीच बॉन्ड बेचने का निर्णय चुनाव आयोग की अनुमति के बाद लिया गया है।


बॉन्ड के समर्थन में चुनाव आयोग
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा, अगर चुनावी बॉन्ड की बिक्री की इजाजत नहीं दी गई तो हम फिर से बगैर हिसाब-किताब वाले दौर में पहुंच जाएंगे। इसमें कम से कम जवाबदेही तो है। आयोग सिर्फ ज्यादा पारदर्शिता चाहता है। वही याचिकाकर्ता संगठन एडीआर की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि चुनावी बॉन्ड वास्तव में फर्जी कंपनियों के जरिये राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा है।

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