SC: ‘वैश्विक निवेश बैंक को छह माह तक हर महीने एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करें’, स्पाइजेट को दिया आदेश
हाल ही में सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पाइसजेट के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजय सिंह से कहा कि आपको सहमति की शर्तों का पालन करना होगा। आप मर ही क्यों न जाएं, हमें इसकी चिंता नहीं लेकिन आप भुगतान करना होगा नहीं तो हम आपको तिहाड़े जेल भेज देंगे।
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सुप्रीम कोर्ट इन दिनों स्पाइसजेट के खिलाफ सख्त नजर आ रहा है। अदालत ने शुक्रवार को हवाईजहाज कंपनी को आदेश दिया कि वह वैश्विक निवेश बैंक और वित्तीय सेवा फर्म क्रेडिट को छह महीने तक प्रति माह एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करे। बता दें, स्पाइसजेट एक स्विस फर्म को मासिक किस्त के रूप में 0.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का पहले से ही भुगतान कर रही है।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दो सदस्यीय पीठ से अनुरोध किया था, जिसके बाद सुप्रीम के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने स्पाइसजेट को आदेश दिया कि सुइस एजी को वह हर महीने छह महीने तक एक मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करे। इसके बाद एयरलाइन सातवें महीने से स्विस फर्म को 0.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना शुरू कर सकती है। मामले में अगली सुनवाई 20 अक्तूबर तय की गई है।
पीठ ने हाल ही में दी थी चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच डिली-डेली बिजनेस से नाराज है। हाल ही में सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पाइसजेट के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजय सिंह से कहा कि आपको सहमति की शर्तों का पालन करना होगा। आप मर ही क्यों न जाएं, हमें इसकी चिंता नहीं लेकिन आप भुगतान करना होगा नहीं तो हम आपको तिहाड़े जेल भेज देंगे।
यह है क्रेडिट सुइस और स्पाइसजेट का विवाद
दरअसल, क्रेडिट सुइस व स्पाइसजेट के बीच 2015 से कानूनी विवाद चल रहा है। क्रेडिट सुइस ने एयरलाइंस पर 2.4 करोड़ डॉलर (करीब 198 करोड़ रुपये) के बकाये का दावा किया है। मद्रास हाईकोर्ट ने 2021 में कंपनी बंद करने का आदेश दिया था। अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया था और दोनों पक्षों को इसका समाधान निकालने के लिए कहा था।
बीते साल अगस्त में दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वे मामले को निपटाने के लिए सहमत हो गए हैं। मगर, इसी साल मार्च में क्रेडिट सुइस ने स्पाइसजेट के एमडी अजय सिंह के खिलाफ अवमानना का मामला दायर किया था। एयरलाइंस का कहना था, कंपनी सेटलमेंट की शर्तों के मुताबिक अपने बकाये का भुगतान करने में नाकाम रही है।